आजकल कंपनियां अपने स्मार्टफोन में एक से बढ़कर एआई फीचर्स देने की होड़ में लगी हुई हैं. भले ही यूजर्स को इन फीचर्स की ज्यादा फिक्र न हो, लेकिन कंपनियां अपने फोन को एआई लोडेड बना रही हैं. इन एआई फीचर्स की कीमत बाकी पार्ट्स के साथ-साथ फोन की बैटरी को भी चुकानी पड़ रही है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे एआइ फीचर के कारण आपके फोन की बैटरी लाइफ कम हो रही है और कैसे इससे बचा जा सकता है.
एआई फीचर्स का बैटरी पर क्या असर?
कई एआई प्रोसेसेस ऐसी होती हैं, जो क्लाउड कंप्यूटिंग से न होकर ऑन-डिवाइस होती है. आजकल फोन के प्रोसेसर में एक न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (NPU) लगी होती है, जो मशीन लर्निंग से जुड़ा सारा काम करती है. यही यूनिट स्पीच रिकग्नेशन, इमेज प्रोसेसिंग और लाइव टेक्स्ट ट्रांसलेशन जैसे काम करती है और इन सब कामों को पावर देने के लिए पड़ती है बैटरी की जरूरत.

फोन की बैटरी पर लोड पड़ने का दूसरा कारण भी एआई से जुड़ा हुआ है. दरअसल, जेमिनी नैनो जैसे ऑन-डिवाइस LLM अपने मॉडल का ज्यादातर पार्ट रैम पर लोड रखते हैं. इसका फायदा यह होता है कि उन्हें डिवाइस स्टोरेज से डेटा फैच नहीं करना पड़ता, लेकिन इसका नुकसान यह है कि इससे रैम ओवरलोड रहती है. इस कारण फोन का सिस्टम रैम को फ्री रखने के लिए कुछ ऐप्स को क्लोज कर देता है. जब यूजर इन्हें दोबारा यूज करता है तो ये ज्यादा बैटरी की खपत करता है.
इससे कैसे बचा जा सकता है?
अगर आप एआई फीचर्स का ज्यादा यूज नहीं करते हैं तो इन्हें डिसेबल किया जा सकता है, जिससे बैटरी की बचत होगी. आप अपने डिवाइस पर नाऊ प्लेयिंग, लाइव ट्रांसलेशन, एआई वालपेपर, स्मार्ट रिप्लाई और स्क्रीन कॉन्टेक्स्ट एनालिसिस करने वाले फीचर्स को डिसेबल कर सकते हैं. इससे बैटरी की भी बचत होगी और आपके डिवाइस की स्पीड भी तेज होगी.
