पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने टीएमसी को हराकर बड़ी जीत हासिल की है. इस बड़ी जीत के बाद अब राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. अभी तक पार्टी ने किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, इसलिए सस्पेंस बना हुआ है. कई लोग मान रहे हैं कि सुवेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके ही क्षेत्र में हराकर सबको चौंका दिया, मुख्यमंत्री बन सकते हैं, लेकिन पार्टी के अंदर कुछ और नामों पर भी चर्चा चल रही है. इसी बीच, यह जानना भी दिलचस्प है कि पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री कौन थे और उस समय उनकी सैलरी आज के मुकाबले कितनी हुआ करती थी.
कौन थे पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री?
पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री प्रफुल्ल चंद्र घोष थे. उन्होंने 15 अगस्त 1947 को, यानी भारत की आजादी के दिन, इस पद की जिम्मेदारी संभाली. उस समय मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री भी कहा जाता था. उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं था . वे 14 जनवरी 1948 तक, यानी लगभग 5 महीने तक इस पद पर रहे.
पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री की सैलरी कितनी थी?
उस समय मुख्यमंत्री की सैलरी आज की तरह ज्यादा नहीं होती थी. आज के नेताओं की तुलना में उनकी सैलरी काफी कम और नॉर्मल थी, हालांकि सटीक आंकड़ा हर जगह दर्ज नहीं मिलता, लेकिन उस दौर में मुख्यमंत्री की सैलरी कुछ हजार रुपये के आसपास होती थी.

पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री शिक्षा
प्रफुल्ल चंद्र घोष का जन्म 1891 में ढाका में हुआ था. वे पढ़ाई में बहुत तेज थे और उन्होंने रसायन विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की.वे कलकत्ता टकसाल (Mint) में उप-परख मास्टर (Deputy Assay Master) भी बने और इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय थे.
पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री राजनीति में कैसे आए?
तना अच्छा वैज्ञानिक करियर होने के बाद भी उन्होंने देश की आजादी के लिए सब कुछ छोड़ दिया. वे महात्मा गांधी के विचारों से बहुत प्रभावित थे और उनके साथ मिलकर असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया.धीरे-धीरे वे कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता बन गए और स्वतंत्रता के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल का नेतृत्व करने का मौका मिला. जब वे मुख्यमंत्री बने, उस समय हालात बहुत मुश्किल थे. भारत का विभाजन हो चुका था. लाखों शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान से आ रहे थे. प्रशासनिक व्यवस्था बिखरी हुई थी. आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. इतने कम समय में इन सभी समस्याओं को संभालना आसान नहीं था.
पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री ने इस्तीफा क्यों दिया?
उनके कार्यकाल के दौरान कांग्रेस पार्टी के अंदर ही कई मतभेद होने लगे थे. नीतियों को लेकर असहमति बढ़ती गई, जिसके कारण उन्होंने जनवरी 1948 में इस्तीफा दे दिया. इसके बाद बिधान चंद्र रॉय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने, जिन्हें बाद में आधुनिक बंगाल का निर्माता कहा गया. प्रफुल्ल चंद्र घोष ने राजनीति नहीं छोड़ी. उन्होंने बाद में अपनी अलग पार्टी बनाई और नवंबर 1967 में एक बार फिर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने. लेकिन उनका दूसरा कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चला, यह फरवरी 1968 तक ही रहा.
