Strait Of Hormuz Import: ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर से दुनिया का सबसे संवेदनशील व्यापारिक गलियारा बन चुका है. दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. हाल ही में हुई रूकावटों की वजह से कच्चे तेल की कीमत $100 से $110 प्रति बैरल से भी ऊपर चली गई है. जहां एक तरफ ऊर्जा से जुड़ी खबरें सुर्खियों में छाई हुई हैं, वहीं एक और अहम सवाल सामने आ रहा है. तेल और गैस के बाद होर्मुज से गुजरने वाली सबसे जरूरी चीज कौन सी है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा
तेल और गैस के बाद फर्टिलाइजर ही सबसे जरूरी इंपोर्ट है जिन्हें होर्मुज के रास्ते से लाया जाता है. इस वजह से यह रास्ता न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा के लिए बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी काफी जरूरी हो जाता है. फर्टिलाइजर की सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है. इससे दुनिया भर में खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है.
होर्मुज के रास्ते होने वाले दूसरे आयात
फर्टिलाइजर के अलावा इस रास्ते से कई दूसरी जरूरी चीजें भी गुजरती हैं. एल्युमिनियम जैसी धातु और हीलियम जैसी औद्योगिक गैस अपने वैश्विक व्यापार के लिए इसी गलियारे पर निर्भर करती हैं. इसके अलावा एलपीजी भी काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है. भारत अपनी जरूरत की लगभग 60% एलपीजी आयात करता है और उसमें से लगभग 90% एलपीजी होर्मुज के रास्ते से ही आती है.

भारत में कीमतों पर सीधा
हाल के तनाव का असर भारत में कीमतों पर भी देखने को मिला है. दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगभग ₹60 की बढ़ोतरी हुई. जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं वैसे-वैसे ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है. इसी के साथ क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. इससे भारत के इंपोर्ट बिल पर काफी दबाव बढ़ गया है.
सोने की कीमतों में उछाल
आर्थिक असर सिर्फ ईंधन तक ही सीमित नहीं है. इंपोर्ट की लागत बढ़ने की वजह से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. दूसरी तरफ सोने की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला असर
कच्चे माल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी का असर प्लास्टिक, पेंट और पैकेजिंग जैसी उद्योगों पर भी पड़ रहा है. इसे रोजमर्रा की इस्तेमाल की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है.
