Artemis II Mission: नासा ने केनेडी स्पेस सेंटर में आर्टेमिस II रॉकेट को लॉन्च पैड पर ले जाने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है. आने वाले समय में आर्टेमिस II इंसानों को पहले से कहीं ज्यादा पृथ्वी से दूर भेज पाएगा. इसमें चार एस्ट्रोनॉट चंद्रमा पर उतरे बिना चंद्र कक्षा में जाएंगे. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस मिशन में कौन-कौन से देश शामिल है और किसके पास क्या जिम्मेदारी है.
यूनाइटेड स्टेट्स
यूनाइटेड स्टेट्स नासा के जरिए इस मिशन की रीढ़ है. नासा ने शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम और ओरियन ग्रुप कैप्सूल, जो एस्ट्रोनॉट को चंद्रमा के चारों ओर ले जाएगा, को डिजाइन किया और बनाया है. बोर्ड पर चार एस्ट्रोनॉट में से तीन अमेरिकी हैं. कमांडर के रूप में रीड वाइजमैन, पायलट के रूप में विक्टर ग्लोवल और मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में क्रिस्टीना कोच. उनका काम स्पेसक्राफ्ट कंट्रोल और नेविगेशन से लेकर गहरे अंतरिक्ष में सिस्टम टेस्टिंग तक है.
लॉन्च और मिशन ऑपरेशन के अलावा अमेरिकी नौसेना भी स्पलैशडाउन के बाद प्रशांत महासागर से ओरियन कैप्सूल और क्रू को रिकवर करके एक बड़ी भूमिका निभाती है.

यूरोप
यूरोप का योगदान यूरोपियन स्पेस एजेंसी के जरिए से आता है. इन्होंने मिशन के सबसे जरूरी कंपोनेंट में से एक यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल बनाया है. यह मॉड्यूल ओरियन स्पेसक्राफ्ट के इंजन रूम के रूप में काम करता है. यह एस्ट्रोनॉट को बिजली, पानी, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन सप्लाई करता है. इतना ही नहीं बल्कि यह प्रोपल्शन और तापमान रेगुलेशन को भी कंट्रोल करता है. यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल एक महाद्वीपीय कोशिश है. इसे जर्मनी में एयरबस लीड कर रहा है. साथ ही इसमें इटली और फ्रांस के साथ 10 से ज्यादा यूरोपीय देशों का योगदान है.
कनाडा
कनाडा इस मिशन में इंसानी मौजूदगी और लंबे समय तक तकनीकी योगदान के जरिए एक ऐतिहासिक भूमिका निभा रहा है. कनाडा स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन एक मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में उड़ान भरेंगे. यह चंद्रमा के पास यात्रा करने वाले पहले गैर अमेरिकी नागरिक बनेंगे. उन्हें स्पेसक्राफ्ट सिस्टम की निगरानी करने और मिशन प्रयोग में सहायता करने की जिम्मेदारी सौंप गई है.
