दुनिया का सबसे ठंडा और बर्फ से ढका इलाका अचानक वैश्विक राजनीति का सबसे गर्म मुद्दा बन गया है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर खुलकर बयान दे चुके हैं. सवाल यह है कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित, कम आबादी वाला यह द्वीप ट्रंप को इतना क्यों भा रहा है? क्या वजह सिर्फ सुरक्षा है या बर्फ के नीचे छुपे संसाधनों ने महाशक्तियों की नजरें यहां टिका दी हैं? आइए जानते हैं पूरी कहानी.
ट्रंप का ग्रीनलैंड प्रेम फिर क्यों चर्चा में?
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की इच्छा दोहराकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. इससे पहले भी ट्रंप इस द्वीप को खरीदने की बात कह चुके हैं. अब एक बार फिर उन्होंने साफ किया है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है. ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव बढ़ गया है, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है.
दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप, लेकिन सबसे कम आबादी
ग्रीनलैंड क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. यह करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और जर्मनी से लगभग छह गुना बड़ा है. इसके बावजूद यहां सिर्फ करीब 56 हजार लोग रहते हैं. ज्यादातर आबादी इनुइट समुदाय की है, जो सदियों से यहां रहकर अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं.
क्या है ग्रीनलैंड की सबसे बड़ी ताकत?
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है. यह उत्तरी अमेरिका और आर्कटिक के बीच स्थित है. रक्षा के लिहाज से यह इलाका बेहद अहम माना जाता है. यहां से मिसाइल हमले की आशंका को काफी पहले भांपा जा सकता है. इसी वजह से अमेरिका पहले से ही यहां एक अहम सैन्य ठिकाना संचालित करता है, जिसे पहले थुले एयर बेस कहा जाता था और अब इसे पिटुफिक स्पेस बेस के नाम से जाना जाता है.

आर्कटिक में बढ़ती महाशक्तियों की टक्कर
आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका अकेला खिलाड़ी नहीं है. रूस और चीन भी इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. बढ़ती नौवहन गतिविधियां, नए समुद्री रास्ते और संसाधनों की खोज ने इस क्षेत्र को रणनीतिक युद्धभूमि बना दिया है. ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिका पीछे हटा, तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर प्रभाव जमा सकते हैं.
बर्फ के नीचे छुपा कीमती खजाना
ग्रीनलैंड का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बर्फ से ढका है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते यह बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही है. इसके साथ ही जमीन के नीचे छुपे दुर्लभ पृथ्वी खनिज, यूरेनियम, लोहा और अन्य धातुओं तक पहुंच आसान होती जा रही है. माना जाता है कि यहां तेल और गैस के भी बड़े भंडार हो सकते हैं. यही वजह है कि दुनिया की बड़ी ताकतें यहां दिलचस्पी ले रही हैं.
किस पर टिकी है ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था?
ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था फिलहाल मछली उद्योग पर निर्भर है. इसके अलावा डेनमार्क सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता यहां की रीढ़ मानी जाती है. खनन को लेकर स्थानीय लोगों में मतभेद हैं. कुछ लोग इसे विकास का रास्ता मानते हैं, तो कुछ पर्यावरण और संस्कृति को लेकर चिंतित हैं.
सुरक्षा बनाम संसाधन, असली वजह क्या?
ट्रंप बार-बार कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड में उनकी दिलचस्पी खनिजों के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा और संसाधन दोनों ही इस कहानी के अहम हिस्से हैं. आने वाले वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र की अहमियत और बढ़ने वाली है.
