भारत में iPhone को लेकर लोगों की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है. डिजाइन, कैमरा और परफॉर्मेंस के नाम पर iPhone को एक प्रीमियम पहचान मिल चुकी है. लेकिन जैसे ही कीमत की बात आती है, भारतीय ग्राहकों के पसीने छूट जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि अब iPhone भारत में असेंबल भी होने लगा है, फिर भी इसकी कीमत अमेरिका या दुबई जैसे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा रहती है.
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अगर कीमतों पर नजर डालें तो फर्क साफ दिखाई देता है. iPhone 17 Pro के 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत भारत में करीब 1,34,900 रुपये है. वहीं दुबई में यही फोन लगभग 1,15,000 रुपये के आसपास मिल जाता है और अमेरिका में इसकी कीमत करीब 99,000 रुपये पड़ती है. यानी एक ही फोन के लिए भारतीय ग्राहकों को हजारों रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं. सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्यों?
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इसकी सबसे बड़ी वजह भारत का टैक्स सिस्टम है. भले ही iPhone की असेंबलिंग अब भारत में हो रही हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फोन पूरी तरह यहीं बनता है. iPhone के कई अहम पार्ट्स जैसे OLED डिस्प्ले, प्रोसेसर चिप, कैमरा मॉड्यूल और अन्य कंपोनेंट्स विदेशों से मंगाए जाते हैं. इन पार्ट्स पर आयात शुल्क लगता है जिससे फोन बनाने की कुल लागत बढ़ जाती है.
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इसके अलावा भारत में स्मार्टफोन पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है. यही टैक्स फोन की अंतिम कीमत को और ज्यादा बढ़ा देता है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी iPhone की बेस कीमत 1 लाख रुपये मान ली जाए, तो सिर्फ जीएसटी जोड़ने के बाद ही इसकी कीमत करीब 1.18 लाख रुपये हो जाती है. जब इसमें आयात शुल्क और दूसरे टैक्स जुड़ते हैं, तो कीमत और ऊपर चली जाती है.
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एक और जरूरी बात यह है कि असेंबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग में फर्क होता है. भारत में Tata Electronics, Foxconn और Pegatron जैसी कंपनियों की फैक्ट्रियों में iPhone की असेंबलिंग की जाती है. इसका फायदा जरूर मिलता है, लेकिन जब तक ज्यादातर पार्ट्स देश में ही नहीं बनते, तब तक लागत में बड़ी गिरावट आना मुश्किल है. यही वजह है कि भारत में असेंबल होने के बावजूद iPhone सस्ता नहीं हो पाता.
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कुल मिलाकर कहा जाए तो भारत में iPhone के महंगे होने के पीछे ब्रांड नहीं, बल्कि टैक्स स्ट्रक्चर और आयात पर निर्भरता सबसे बड़ी वजह है. जब तक देश में कंपोनेंट्स का लोकल प्रोडक्शन नहीं बढ़ता और टैक्स का बोझ कम नहीं होता, तब तक भारतीय ग्राहकों को iPhone के लिए ज्यादा कीमत चुकानी ही पड़ेगी.
