लोक पारंपरिक वेशभूषा में ग्राम भ्रमण, नृत्य–गीतों ने मोहा मन
नगरी। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला टेंगना में संयुक्त तत्वाधान में एक दिन पूर्व छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व छेरछेरा बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्कूली छात्र–छात्राओं ने लोक परंपराओं का पालन करते हुए पर्व की महत्ता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
पर्व के आयोजन में पालकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और छेरछेरा की परंपरा को समझते हुए खुशी-खुशी अन्नदान किया। विद्यालय की प्रधान पाठक ममता प्रजापति द्वारा बालिकाओं को लोक पारंपरिक परिधान पहनाकर तथा छत्तीसगढ़ी लोकगीत सिखाकर तैयार किया गया। ग्राम भ्रमण के दौरान बालिकाओं ने मनमोहक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत किए, जिसे देखकर ग्रामीणों एवं जनसमुदाय ने खूब प्रशंसा की।

इस अवसर पर शिक्षक संतोष कुमार बांधव ने बताया कि छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोकपर्व है। इस दिन किसान नई फसल आने की खुशी में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और दान-पुण्य कर अपनी खुशी का इजहार करते हैं। उन्होंने बताया कि सुबह से ही घर-घर छत्तीसगढ़ी लोकगीत
“अरन-बरन कोदों दरन, जभे देबें तभे टरन छेरछेरा… माई कोठी के धान ला हेर-हेरा”
की गूंज सुनाई देती है। बच्चे और युवा टोली बनाकर दान मांगने निकलते हैं। जिनके पास अन्न नहीं होता, वे श्रद्धा से रुपए-पैसे या खाने-पीने की सामग्री दान करते हैं।
कार्यक्रम में जनभागीदारी अध्यक्ष खमन लाल मरकाम, प्रधान पाठक मनोज कुमार गंजीर, ममता प्रजापति, संतोष बांधव, यतींद्र गौर, टिकेंद्र कंवर, सौरभ वैदे, अनीता कश्यप, लक्ष्मी ध्रुव सहित शिक्षकगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
