अजोला बेड, गेंदा पिंचिंग व मोरिंगा मूल्य–वर्धन की तकनीक सिखाई**
धमतरी | 26 नवंबर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर) के चतुर्थ वर्ष के छात्रों ने RAWE (ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव) कार्यक्रम के तहत ग्राम बानगर में किसानों और महिला स्व–सहायता समूहों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
अजोला बेड निर्माण का प्रदर्शन
विद्यार्थियों ने अजोला बेड तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया दिखाते हुए बताया कि
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अजोला उच्च प्रोटीन युक्त पशुचारा है,
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मछली पालन के लिए पोषक तत्व का स्रोत है,
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तथा खेतों के लिए जैव–उर्वरक की तरह कार्य करता है।
गेंदा फसल में पिंचिंग से 20–25% अधिक उत्पादन
गेंदा फसल पर पिंचिंग तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। छात्रों ने बताया कि 25–30 दिन की अवस्था में शीर्ष कलिका हटाने से—
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शाखाएँ बढ़ती हैं,
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पौधे संतुलित रहते हैं,
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फूलों की संख्या अधिक व समान आकार की मिलती है,
जिससे उत्पादन में 20–25% तक वृद्धि संभव होती है।

महिला समूहों को मोरिंगा मूल्य–वर्धन का प्रशिक्षण
महिला समूहों को मोरिंगा पत्तियों की
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वैज्ञानिक तुड़ाई,
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छाया में सुखाने,
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भंडारण,
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और पैकिंग की विधियाँ
समझाई गईं। साथ ही यह भी बताया गया कि पत्तियों से पाउडर, ग्रीन टी, कैप्सूल, मिश्रित दलिया/सेवई जैसे कई मूल्य–वर्धित उत्पाद तैयार कर घरेलू आय बढ़ाई जा सकती है।
मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम
प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. नवनीत राणा (डीन) के निर्देशन,
डॉ. भूमिका हत्गिया (RAWE समन्वयक) के मार्गदर्शन
तथा डॉ. गुलाब बर्मन और श्री सोनू दिवाकर (विषय विशेषज्ञ) के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
