बिहार के अररिया में बीते सोमवार (24 नवंबर, 2025) को एक फर्जी दारोगा को गिरफ्तार किया गया. ये बीते करीब दो साल से पुलिस की वर्दी पहनकर और नकली पिस्टल के साथ लोगों से ठगी कर रहा था. आरोपी की पहचान मधेपुरा जिले के कुमारखंड दुधेला बराही निवासी रणवीर कुमार के रूप में हुई है.
बताया जाता है कि ये अपनी पत्नी के साथ फारबिसगंज बाजार में किराए के मकान में रहकर ठगी का नेटवर्क चला रहा था. सोमवार को रणवीर एसपी गोपनीय कार्यालय एक केस की पैरवी और मैनेज करने पहुंचा था. इसके व्यवहार पर संदेह हुआ तो पूछताछ में असलियत सामने आ गई.
लोगों से रुपये ठगता था फर्जी दारोगा
इस पूरे मामले में नगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार रजक ने बताया कि आरोपी बीते करीब दो साल से दारोगा की नकली वर्दी पहनकर पैरवी के नाम पर लोगों से रुपये ठगता था. 15 दिन पहले भी वह खुद को पलासी थाना में पदस्थापित बताकर गोपनीय कार्यालय पहुंचा था. उसी समय से पुलिस की नजर उसकी गतिविधियों पर थी. सोमवार को जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
बता दें कि जिले में इसके पहले भी इस तरह के ठगी के मामले आ चुके हैं. करीब छह साल पहले जोकीहाट के भेभरा चौक पर भी एक युवक को सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते हुए पकड़ा गया था. पलासी थाना क्षेत्र के उरलाहा चौक निवासी सरयुग साह नामक युवक लेनदेन के विवाद में खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर रौब जमा रहा था. इसके बाद तत्कालीन एसडीपीओ केडी सिंह के निर्देश पर उसे गिरफ्तार किया गया था.
दो साल तक कैसे चलता रहा खेल?
दूसरी ओर रणवीर कुमार की गिरफ्तारी के बाद बड़ा सवाल यह है कि आखिर दो वर्षों तक वह वर्दी पहनकर पुलिस विभाग और प्रशासनिक कार्यालयों में बेरोकटोक कैसे घूमता रहा? उसने न केवल कई लोगों से ठगी की, बल्कि सरकारी दफ्तरों में बिना आपत्ति प्रवेश भी करता रहा. पुलिस विभाग की यह कार्यप्रणाली अब गंभीर जांच का विषय बन गई है.
