राजस्थान में कोटा समेत कुछ जगहों पर गरबा और डांडिया पंडालों में गैर हिंदुओं की एंट्री पर विवाद छिड़ा हुआ है. वहीं इस बीच भजनलाल शर्मा सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का बयान सामने आया है. उनका मानना है कि नवरात्री के पंडालों में धर्म के आधार पर एंट्री नहीं होनी चाहिए.
वहीं मंत्री जोराराम ने गरबा विवाद के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर पलटवार किया है. उनका कहना है कि सरकार को बदनाम करने के लिए विपक्षी दल धार्मिक भेदभाव की साजिश रच रहे हैं. राजस्थान हमेशा से आपसी एकता और भाईचारे के साथ ही सामाजिक सद्भावना व सौहार्द की मिसाल पेश करने वाला राज्य है.
‘नहीं किया जाता भेदभाव’
उन्होंने कहा कि यहां धार्मिक आधार पर कभी भी कोई भेदभाव नहीं किया जाता है. सरकार के साथ ही गरबा और डांडिया के कार्यक्रम करने वाले आयोजक भी सद्भावना व सौहार्द पेश करते हैं.
मंत्री के मुताबिक कोटा व कुछ अन्य जगहों पर मुसलमानों की एंट्री को लेकर जो विवाद हुआ है, उसके पीछे विपक्ष की साजिश है.
विपक्ष हमें यानी सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह के काम करता है और दुष्प्रचार करता है. कई विभागों के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का कहना है कि सरकार भी चाहती है कि सभी धर्म के लोग त्योहारों को परंपराओं के मुताबिक साथ मिलजुल कर मनाएं. एक दूसरे की खुशियों में सहभागी बने.
‘ईश्वर-अल्लाह में फर्क नहीं’
उनका कहना है कि नवरात्र पर हर तरफ यही संदेश भी दिया जा रहा है. कहीं भी मुसलमानों की एंट्री पर कोई रोक नहीं है. ईश्वर और अल्लाह में कोई फर्क नहीं होता है. राजस्थान में सभी लोग एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं. यहां साथ मिलकर त्योहारों को मनाए जाने की परंपरा आज भी कायम है.
कोटा में टिकट लेने के बावजूद मुस्लिम छात्राओं को पंडाल में एंट्री नहीं दिए जाने के पीछे भी विपक्ष की साजिश की आशंका है. इस मामले में सच्चाई का पता लगाया जाएगा और उचित कदम भी उठाए जाएंगे.
कांग्रेस ने लगाया नफरत फैलाने का आरोप
मंत्री जोराराम कुमावत ने विपक्ष को कारगुजारियों से बाज आकर गड़बड़ी करने से बचने की नसीहत दी है. दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव स्वर्णिम चतुर्वेदी ने मंत्री जोराराम कुमावत की पार्टी और सरकार पर नफरत फैलाकर सामाजिक सौहार्द खराब करने और सियासी रोटियां सेंकने का आरोप लगाया है.
उनके मुताबिक कांग्रेस हमेशा भाईचारे को बढ़ावा देती है, जबकि समाज को बांटने का काम बीजेपी और इसके सहयोगी संगठन ही करते है. पंडालों में इंट्री को लेकर भी बीजेपी से जुड़े लोगों की ही शरारत है.
