धमतरी/ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में वन्यजीवों के अवैध शिकार के लिए विस्फोटकों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। एंटी-पोचिंग यूनिट ने कार्रवाई करते हुए नबरंगपुर, ओडिशा के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 13 जिंदा पोटाश बम समेत शिकार में इस्तेमाल होने वाले कई औजार बरामद किए गए हैं।
छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, 29 सितंबर को रिसगांव परिक्षेत्र के RF कक्ष क्रमांक 254 एवं 255 के अंतर्गत छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे चिखलापानी क्षेत्र में एंटी-पोचिंग टीम को शिकार की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई करते हुए नरसिंह (करीब 50 वर्ष) और मान सिंह (करीब 22 वर्ष), दोनों निवासी ग्राम खिलौली, जिला नबरंगपुर, ओडिशा को पकड़ा।
मौके पर दो अन्य व्यक्ति भी मौजूद थे, लेकिन टीम को देखकर दोनों फरार हो गए। फरार आरोपियों की तलाश और मामले की जांच जारी है।
जंगली सूअर के शिकार का आरोप
वन विभाग के अनुसार, दोनों आरोपियों को कथित तौर पर विस्फोटक का इस्तेमाल कर जंगली सूअर का शिकार करने और उसके शव को काटने की स्थिति में पकड़ा गया। मौके से 13 जिंदा पोटाश बम के अलावा टंगिया, चाकू, हंसिया और कट्टा सहित अन्य सामान जब्त किया गया।
वहीं, विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने के आरोप में भारत पिता रामजी राठौर, निवासी ग्राम कोहराबेड़ा, थाना विश्रामपुरी, जिला कोंडागांव के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए उसे गिरफ्तारी के स्थान पर BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
मामले में POR क्रमांक 70/22 के तहत वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं में वन अपराध दर्ज किया गया है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को 1 अक्टूबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, नगरी के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
तलाशी में अतिरिक्त संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद
पूछताछ और जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर एक आरोपी से संबंधित परिसर में संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान हथियार संबंधी सामग्री, 29 कारतूस, दो बम/पटाखा प्रकार की सामग्री और 20 टिकली पटाखे बरामद किए गए।
इसके अलावा करीब 0.200 किलोग्राम, 0.230 किलोग्राम, 0.100 किलोग्राम और 0.008 किलोग्राम मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।

व्यापक नेटवर्क की भी जांच
USTR के उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, बरामदगी इस संभावना की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है कि वन्यजीवों के शिकार में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटक केवल अलग-अलग घटनाओं तक सीमित नहीं हैं। विस्फोटकों के संग्रहण, आपूर्ति और इस्तेमाल से जुड़ी व्यापक गतिविधि की भी जांच की जा रही है।
Explosive Substances Act के तहत भी कार्रवाई
वन विभाग के मुताबिक, विस्फोटक पदार्थों के अवैध कब्जे या उपयोग से जुड़े मामलों में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर Explosive Substances Act, 1908 की लागू धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दर्ज मामलों में भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब यह जांच का विषय है कि वन्यजीवों के शिकार के लिए विस्फोटक सामग्री आरोपियों तक कैसे पहुंच रही थी और इसके पीछे कोई संगठित सप्लाई चैन सक्रिय है या नहीं।
