Iran Oil: ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संघर्ष अब समाप्त हो चुका है. इस संघर्ष ने महीनों तक वैश्विक ऊर्जा बाजार को बाधित किया हुआ था. तनाव के दौरान होर्मुज पर चिंता और कच्चे तेल की आवाजाही पर प्रतिबंध ने भारत के साथ-साथ बड़े तेल आयातक देशों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी थी. स्थिति स्थिर होने के बाद ध्यान एक बार फिर से ईरानी तेल निर्यात के अर्थशास्त्र पर पड़ा है. आइए जानते हैं कि ईरान भारत जैसे देशों को बेचे गए हर बैरल से कितना मुनाफा कमाता है.
भारत से होने वाली कमाई
रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्पादन और परिवहन लागत को ध्यान में रखते हुए ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचे जाने वाले हर बैरल कच्चे तेल पर लगभग $50 से $70 का शुद्ध लाभ कमाता है. ईरान की मजबूत कमाई के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी कम उत्पादन लागत है. ईरान के पास बड़े तेल भंडार हैं जिन तक पहुंचना काफी ज्यादा आसान है.
इससे कई दूसरे तेल उत्पादक देशों की तुलना में काफी कम लागत पर कच्चा तेल निकाला जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में एक बैरल तेल के उत्पादन की औसत लागत $10 से $20 के बीच है. कुछ मैच्योर ऑयल फील्ड में तेल निकालने की लागत और भी कम हो जाती है.

बाजार मूल्य बनाम उत्पादन लागत
एक मानक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत आमतौर पर 69 डॉलर से 75 डॉलर प्रति बैरल के बीच उतार चढ़ाव करती रहती है. अगर ईरान लगभग 15 डॉलर में एक बैरल का उत्पादन करता है और इसे लगभग 70 डॉलर में बेचता है तो इसके बीच का अंतर ठीक-ठाक मार्जिन दे देता है. उत्पादन और परिवहन खर्चे में कटौती के बाद ईरान का शुद्ध लाभ आमतौर पर 50 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच आता है.
छूट और प्रीमियम मूल्य निर्धारण की भूमिका
अंतर्राष्ट्रीय बैन के समय ईरान अक्सर खरीदारों को आकर्षित करने के लिए अच्छी खासी छूट दे रहा था. भारत और चीन जैसे देश कथित तौर पर मौजूदा बाजार दरों से कम कीमत पर ईरानी कच्चे तेल को खरीदने में सक्षम थे. यह छूट कभी-कभी $5 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती थी. हालांकि बैन में ढील और मांग में सुधार के साथ ईरान तेजी से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों के करीब तेल बेचने की तरफ बढ़ गया है. कुछ मामलों में ईरानी क्रूड अब बेंचमार्क दरों से 2 डॉलर से 3 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियर पर पेश किया जाता है.
रुपया रियाल व्यापार और ज्यादा फायदा देता है
भारत ईरान व्यापार का एक अनूठा पहलू वैकल्पिक भुगतान तंत्र का इस्तेमाल रहा है. ईरान ने पूरी तरह से अमेरिकी डॉलर पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मुद्रा व्यवस्था के जरिए भुगतान स्वीकार करने की इच्छा दिखाई है. ऐसी व्यवस्था के तहत भुगतान भारतीय बैंकिंग चैनलों में जमा किया जाता है. इसके बाद ईरान भारत से दवा, चाय, चावल और दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए पैसे का इस्तेमाल कर सकता है.
