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आज के डिजिटल दौर में Wi-Fi और मोबाइल इंटरनेट हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. घर हो या ऑफिस, राउटर 24 घंटे चालू रहता है और स्मार्टफोन भी हर वक्त नेटवर्क से जुड़े रहते हैं. इसी बीच लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या रात के समय Wi-Fi या मोबाइल डेटा चालू रखना सेहत के लिए ठीक है या फिर इसे बंद कर देना बेहतर होता है. कई बार सोशल मीडिया पर डराने वाली बातें भी सामने आती हैं लेकिन हकीकत जानने के लिए जरूरी है कि हम साइंस और रिसर्च को समझें.

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Wi-Fi राउटर और मोबाइल नेटवर्क से निकलने वाली तरंगों को EMF यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड कहा जाता है. ये नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन की श्रेणी में आती हैं मतलब इनमें इतनी ऊर्जा नहीं होती कि ये शरीर के DNA को नुकसान पहुंचा सकें. वैज्ञानिकों का कहना है कि आम घरों में इस्तेमाल होने वाला Wi-Fi सिग्नल तय सुरक्षा मानकों के भीतर ही होता है. हालांकि लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने को लेकर अब भी रिसर्च चल रही है लेकिन फिलहाल कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि इससे गंभीर बीमारियां होती हैं.
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कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और नेटवर्क से निकलने वाली तरंगें नींद को थोड़ा प्रभावित कर सकती हैं. खासकर मेलाटोनिन हार्मोन, जो नींद के लिए जरूरी होता है, उस पर हल्का असर पड़ने की बात कही गई है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि Wi-Fi सिग्नल से ज्यादा नुकसान स्क्रीन टाइम और देर रात तक फोन इस्तेमाल करने की आदत से होता है. लगातार नोटिफिकेशन और ऑनलाइन एक्टिविटी दिमाग को एक्टिव बनाए रखती है जिससे नींद में खलल पड़ता है.
कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और नेटवर्क से निकलने वाली तरंगें नींद को थोड़ा प्रभावित कर सकती हैं. खासकर मेलाटोनिन हार्मोन, जो नींद के लिए जरूरी होता है, उस पर हल्का असर पड़ने की बात कही गई है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि Wi-Fi सिग्नल से ज्यादा नुकसान स्क्रीन टाइम और देर रात तक फोन इस्तेमाल करने की आदत से होता है. लगातार नोटिफिकेशन और ऑनलाइन एक्टिविटी दिमाग को एक्टिव बनाए रखती है जिससे नींद में खलल पड़ता है.
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बच्चों का दिमाग अभी विकास की प्रक्रिया में होता है इसलिए कुछ डॉक्टर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. इसी तरह गर्भवती महिलाओं को भी अनावश्यक एक्सपोजर से बचने की बात कही जाती है. हालांकि अब तक किसी भी स्टडी में यह साबित नहीं हुआ है कि रात में Wi-Fi चालू रहने से बच्चों या गर्भ में पल रहे बच्चे को सीधा नुकसान होता है.
बच्चों का दिमाग अभी विकास की प्रक्रिया में होता है इसलिए कुछ डॉक्टर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. इसी तरह गर्भवती महिलाओं को भी अनावश्यक एक्सपोजर से बचने की बात कही जाती है. हालांकि अब तक किसी भी स्टडी में यह साबित नहीं हुआ है कि रात में Wi-Fi चालू रहने से बच्चों या गर्भ में पल रहे बच्चे को सीधा नुकसान होता है.
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इस विषय पर सालों से रिसर्च की जा रही है लेकिन मोबाइल नेटवर्क या Wi-Fi से कैंसर होने का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने Wi-Fi को संभवतः कैंसरकारी की श्रेणी में रखा है जिसमें कॉफी और अचार जैसी चीजें भी शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि खतरा बहुत कम माना गया है लेकिन आगे और रिसर्च की जरूरत है.
इस विषय पर सालों से रिसर्च की जा रही है लेकिन मोबाइल नेटवर्क या Wi-Fi से कैंसर होने का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने Wi-Fi को संभवतः कैंसरकारी की श्रेणी में रखा है जिसमें कॉफी और अचार जैसी चीजें भी शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि खतरा बहुत कम माना गया है लेकिन आगे और रिसर्च की जरूरत है.
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वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सेहत के लिए इसे बंद करना अनिवार्य नहीं है. लेकिन अगर आप रात में Wi-Fi या मोबाइल इंटरनेट बंद करते हैं तो इससे बिजली की थोड़ी बचत होती है, साइबर सिक्योरिटी का जोखिम कम होता है और सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपका दिमाग डिजिटल शोर से दूर रहकर बेहतर तरीके से आराम कर पाता है. यानी फैसला डर के नहीं, समझदारी और सुविधा के आधार पर लेना बेहतर है.
वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सेहत के लिए इसे बंद करना अनिवार्य नहीं है. लेकिन अगर आप रात में Wi-Fi या मोबाइल इंटरनेट बंद करते हैं तो इससे बिजली की थोड़ी बचत होती है, साइबर सिक्योरिटी का जोखिम कम होता है और सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपका दिमाग डिजिटल शोर से दूर रहकर बेहतर तरीके से आराम कर पाता है. यानी फैसला डर के नहीं, समझदारी और सुविधा के आधार पर लेना बेहतर है.

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