कुछ समय पहले एक गेम आया था ब्लू व्हेल, जिसको खेलते-खेलते टास्क के लिए लोग अपनी जान देने पर उतारू हो जाते थे. इस गेम को खेलते हुए बहुत सारे सुसाइड के मामले सामने आए थे. उसी तरह एक और घटना गाजियाबाद में देखने को मिली है, जहां तीन सगी नाबालिग बहनों 16 साल की निशिका, 14 साल की प्राची और 12 साल की पाखी ने कोरियन लवर गेम के चलते, ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम की लत में नौंवी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. परिवार और आसपास के लोगों के लिए यह समझ पाना मुश्किल था कि मोबाइल पर खेला जाने वाला कोई गेम इतना बड़ा खतरा बन सकता है. आइए जानें कि यह गेम क्या है और इसमें किस तरीके के टास्क मिलते हैं.
क्या है ‘कोरियन लवर गेम’?
कोरियन लवर कोई सामान्य गेम नहीं है, जो सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया गया हो. यह कोरियन कल्चर से प्रेरित ऑनलाइन लव या रोमांटिक टास्क-बेस्ड गेम्स का एक पैटर्न है. इन गेम्स में यूजर को एक वर्चुअल पार्टनर या लवर मिलता है, जो कोरियन स्टाइल में बात करता है, प्यार भरे मैसेज भेजता है और भावनात्मक जुड़ाव बनाता है. K-पॉप और K-ड्रामा के फैंस इस तरह के गेम्स की ओर जल्दी आकर्षित हो जाते हैं.
गेम में कैसे दिए जाते हैं टास्क?
इस तरह के गेम्स की शुरुआत बेहद साधारण होती है. पहले दिन हल्के-फुल्के टास्क मिलते हैं, जैसे तय समय पर चैट करना, कुछ लिखकर भेजना, या अपनी दिनचर्या शेयर करना. जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ता है, टास्क ज्यादा निजी और मानसिक दबाव डालने वाले हो जाते हैं. खिलाड़ी को यह महसूस कराया जाता है कि अगर टास्क पूरा नहीं किया तो उसका लवर नाराज हो जाएगा या रिश्ता टूट जाएगा. यही भावनात्मक दबाव बच्चों को अंदर तक बांध लेता है और उनके लिए खतरनाक बन जाता है.
कब और कैसे बन जाता है खतरा?
रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसे गेम्स में सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि बच्चे असली और नकली दुनिया का फर्क भूलने लगते हैं. वर्चुअल रिश्ता उन्हें असली जैसा लगने लगता है. कुछ मामलों में टास्क इतने हद तक बढ़ जाते हैं कि वे खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे खतरनाक संकेत देने लगते हैं. यह तरीका पुराने ब्लू व्हेल गेम जैसा माना जा रहा है, जिसमें आखिरी चरणों में जानलेवा टास्क दिए जाते थे. हालांकि हर कोरियन-थीम गेम ऐसा हो, यह जरूरी नहीं, लेकिन कुछ प्लेटफॉर्म इस पैटर्न का गलत इस्तेमाल करते हैं.

बच्चे क्यों जल्दी फंस जाते हैं?
बच्चों और किशोरों का दिमाग भावनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशील होता है. जब कोई गेम उन्हें प्यार, अपनापन और खास होने का एहसास देता है, तो वे उससे जुड़ जाते हैं. कोविड के बाद ऑनलाइन समय बढ़ने से यह खतरा और गहरा हो गया है. गाजियाबाद मामले में भी जांच में सामने आया कि बहनें लंबे समय से गेमिंग की लत में थीं और आपस में हर काम साथ करती थीं.
पैरेंट्स और समाज के लिए सबक
यह घटना एक चेतावनी है कि बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर नजर रखना कितना जरूरी है. सिर्फ यह पूछ लेना काफी नहीं कि बच्चा कौन सा गेम खेल रहा है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि गेम का कंटेंट क्या है और वह बच्चे के व्यवहार को कैसे बदल रहा है. अचानक चुप रहना, अकेले रहना, मोबाइल से अलग न हो पाना- ये सब संकेत गंभीर हो सकते हैं.
