जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत अब सिर्फ एक दुखद घटना नहीं रह गई है. यह मामला धीरे-धीरे एक ऐसे रहस्य में बदलता जा रहा है, जिसमें हर कदम पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं. जिन प्रवचनों में साध्वी शांति, सत्य और न्याय की बातें किया करती थीं, आज उसी साध्वी की मौत के बाद हर तरफ न्याय की गुहार सुनाई दे रही है.
शुक्रवार (30 जनवरी) को साध्वी प्रेम बाईसा का समाधि संस्कार उनके पैतृक मठ परेऊ, बालोतरा में किया गया. अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में शिष्य, साधक और अनुयायी मौजूद रहे. माहौल बेहद भावुक था. आंखें नम थीं, लेकिन हर किसी के मन में एक ही सवाल गूंज रहा था, आखिर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कैसे हुई?
साध्वी के पिता और परिजन भी इस दौरान बेहद टूटे हुए नजर आए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सच सामने नहीं आएगा, उन्हें चैन नहीं मिलेगा. उन्हें अब केवल पुलिस जांच से ही उम्मीद है.
अचानक बिगड़ी थी तबीयत
पुलिस के मुताबिक, बुधवार को साध्वी प्रेम बाईसा अजमेर में एक निजी कथा कार्यक्रम में शामिल होकर जोधपुर लौटी थीं. शाम के समय वे आरती नगर स्थित अपने आश्रम पहुंचीं. सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी.
आश्रम में मौजूद लोग घबरा गए. समझ नहीं आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या हो गया. इसी दौरान कॉलोनी में रहने वाले देवी सिंह नाम के एक कंपाउंडर को बुलाया गया.
इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी हालत
पुलिस के अनुसार, कंपाउंडर देवी सिंह ने साध्वी प्रेम बाईसा को डेक्सोरेंज इंजेक्शन लगाया. लेकिन इंजेक्शन लगने के बाद उनकी हालत सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ गई. यही वह पल है, जहां से पूरे मामले की सबसे संदिग्ध कड़ी शुरू होती है.
आश्रम में अफरा-तफरी मच गई. घबराए लोग तुरंत साध्वी को एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

निजी अस्पताल से सीधे आश्रम क्यों ले जाया गया शव?
यहां से मामला और पेचीदा हो जाता है. निजी अस्पताल प्रबंधन ने सलाह दी कि शव को मथुरादास माथुर अस्पताल या महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया जाए, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके. लेकिन साध्वी के पिता शव को अपने साथ सीधे आश्रम ले गए.
इस फैसले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या उस वक्त परिवार सदमे में था? या फिर किसी दबाव या डर की वजह से ऐसा किया गया? जब पुलिस को इस बात की जानकारी मिली, तो वह तुरंत सक्रिय हुई और शव को महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया.
पोस्टमार्टम और फिर समाधि संस्कार
पुलिस ने परिजनों की सहमति के बाद पोस्टमार्टम करवाया. पोस्टमार्टम के दौरान विसरा सैंपल लिए गए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. इसके बाद शुक्रवार को पार्थिव देह का समाधि संस्कार कर दिया गया. हालांकि, अंतिम संस्कार के साथ मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा चर्चा में आ गया.
मौत के 4 घंटे बाद इंस्टाग्राम पर ‘न्याय’ की पोस्ट
पूरे केस का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मौत के करीब 4 घंटे बाद साध्वी प्रेम बाईसा के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई. इस पोस्ट में ‘न्याय’ की मांग की गई थी.
इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर साध्वी के कुछ पुराने वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे पहले से ही किसी मामले को लेकर न्याय की गुहार लगाती नजर आ रही हैं. अब सवाल साफ है, अगर यह पोस्ट साध्वी ने नहीं की, तो फिर किसने की? और क्यों?
आश्रम सील, FSL टीम जांच में जुटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं. एसीपी छवि शर्मा के मुताबिक, आश्रम के कुछ कमरों को सील कर दिया गया है. एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए हैं. पोस्टमार्टम में लिए गए विसरा सैंपल की रिपोर्ट 2 से 3 दिन में आने की उम्मीद है. इसी रिपोर्ट से मौत की असली वजह साफ हो पाएगी.
कंपाउंडर हिरासत में, कई लोग रडार पर
इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर देवी सिंह को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर पहले वायरल हुए वीडियो को लेकर जिन पांच लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज थी, उनसे भी जल्द पूछताछ की जाएगी. पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है, दवा, इंजेक्शन, सोशल मीडिया पोस्ट, पुराने विवाद और आश्रम से जुड़े लोगों की भूमिका तक.
फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े सवालों के जवाब अधूरे हैं. क्या यह महज अचानक बिगड़ी तबीयत का मामला है, या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है, इस पर से पर्दा पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही उठ पाएगा.
