सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर लागू किए गए UGC एक्ट 2026 के खिलाफ देशभर में स्वर्ण समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी कड़ी में जोधपुर किशोर समाज और विभिन्न स्वर्ण समाज संगठनों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस कानून को वापस लेने की मांग की.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि UGC एक्ट 2026 में स्वर्ण समाज को एकतरफा तरीके से दोषी मान लिया गया है, जबकि जनरल कैटेगरी को पीड़ित मानने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है. समाज के लोगों का कहना है कि स्वर्ण समाज में जन्म लेना अपराध नहीं है, लेकिन यह कानून उसी मानसिकता को बढ़ावा देता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के तहत स्वर्ण समाज की लड़की को कोई अन्य युवक प्रपोज करेगा और उसने स्वीकार नहीं किया तो उसे हैरासमेंट के झूठे मामलों में फंसाकर दबाव बनाया जा सकता है.
आंदोलन की चेतावनी, 1 फरवरी को जोधपुर बंद
अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष और बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांग नहीं मानी तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी शुरुआत जोधपुर से की जा रही है.

स्वर्ण समाज संगठनों ने 1 फरवरी को जोधपुर बंद का आह्वान किया है. इस बंद को करणी सेना ने भी समर्थन दिया है. करणी सेना के पदाधिकारियों ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि यह कानून स्वर्ण समाज को दबाने वाला है और यदि जरूरत पड़ी तो UGC कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा.
एक देश एक कानून की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में एक देश एक कानून, एक देश एक चुनाव और एक देश एक टैक्स की बात की जा रही है, वहीं कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के लिए जातिवाद के जरिये सवर्णों को दबाया जा रहा है. यह दोहरा मानदंड है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.
यह विरोध UGC एक्ट 2026 को लेकर देशभर में उठ रहे स्वरों का हिस्सा है. देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस कानून में कोई संशोधन किया जाता है.
