धमतरी/ करीब दो दशकों तक सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों पर आखिरकार कार्रवाई की गाज गिर गई। शिक्षा विभाग ने वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद 8 प्रधान पाठकों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई से जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, 2007 की भर्ती प्रक्रिया के दौरान ही कुछ नियुक्तियों पर सवाल उठे थे, लेकिन समय रहते जांच नहीं हो सकी। वर्षों बाद RTI के माध्यम से दस्तावेज सामने आए, जिनकी विस्तृत जांच में यह साफ हुआ कि कई शिक्षकों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र और नियुक्ति से जुड़े कागजात लगाकर नौकरी हासिल की थी।

हैरानी की बात यह है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चयन के बाद ये शिक्षक करीब 19 साल तक नियमित सेवा में बने रहे। इतना ही नहीं, 2018 में संविलियन का लाभ भी लिया और बाद में पदोन्नत होकर प्रधान पाठक के पद तक पहुंच गए। इस दौरान न तो किसी स्तर पर आपत्ति दर्ज हुई और न ही जांच आगे बढ़ी। जांच पूरी होने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी दोषी प्रधान पाठकों को सेवा से बाहर कर दिया। बर्खास्त किए गए शिक्षकों में एक पहले से ही निलंबित था। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे भी संदिग्ध नियुक्तियों की दोबारा जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले के बाद जिलेभर के शिक्षकों में खलबली है, वहीं ईमानदारी से सेवा दे रहे कर्मचारियों ने विभाग की इस सख्ती को शिक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटाने वाला कदम बताया है।
