गौ सेवकों की गिरफ्तारी पर उबाल, प्रांत-स्तरीय आंदोलन की चेतावनी
गुरूर थाने में हजारों गौ सेवक देंगे गिरफ्तारी, बोले– यह धमकी नहीं, राष्ट्रहित में चेतावनी
बालोद/ गुरूर ब्लॉक के भरदा गांव में बीते सप्ताह रात के समय कथित गौ तस्करी रोकने के मामले में गौ वंश रक्षकों को जेल भेजे जाने से प्रदेशभर के गौ सेवकों में आक्रोश फैल गया है। गौ वंश रक्षक संगठन ने इसे अन्याय बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से गौ सेवक प्रांत-स्तरीय आंदोलन करेंगे और हजारों की संख्या में गुरूर थाने में गिरफ्तारी देंगे।
गौ वंश रक्षकों का आरोप है कि जिस वाहन को रोका गया, वह लगातार रात में गौवंश का परिवहन कर रहा था, जो छत्तीसगढ़ राजपत्र और पशु क्रूरता अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन में आता है। नियमों के अनुसार गौवंश का परिवहन केवल दिन में, कलेक्टर की अनुमति, पशु चिकित्सक के फिटनेस प्रमाण पत्र, पशुपालन अधिकारी की रिपोर्ट और स्थानीय प्रशासन की जानकारी के साथ ही किया जा सकता है।
नियमों का पालन नहीं, फिर भी तस्करों को ‘व्यापारी’ बताया गया
गौ सेवकों का कहना है कि एक व्यक्ति एक समय में अधिकतम पांच गौवंश ही ले जा सकता है, वह भी खुले वाहन में, प्रत्येक दो घंटे में चारा-पानी और विश्राम की व्यवस्था अनिवार्य है। वाहन पर पूरी जानकारी वाला फ्लेक्स लगाना भी जरूरी है। सवाल यह है कि जिन लोगों को समाज के कुछ प्रमुख और जनप्रतिनिधि ‘गौ व्यापारी’ बता रहे हैं, क्या उन्होंने इन नियमों का पालन किया था?

पहले हमला, फिर उल्टा जेल भेजे गए गौ सेवक
गौ वंश रक्षकों के अनुसार वाहन रोकने पर तस्करों ने पहले गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और प्राणघातक हमला किया। गौ सेवकों ने आत्मरक्षा में बीच-बचाव किया, पुलिस को सूचना दी, वाहन थाने तक ले गए और घायलों को अस्पताल भी पहुंचाया। इसके बावजूद गौ सेवकों को जेल भेज दिया गया।
‘गौ सेवक अपराधी और तस्कर व्यापारी?’
संगठन का कहना है कि बिना किसी प्रमाण के यह आरोप लगाया जा रहा है कि गौ सेवकों ने तस्करों के साथ अमानवीय व्यवहार किया, जो पूरी तरह गलत और दुर्भावनापूर्ण है। निस्वार्थ गौशाला चलाने वाले और गौ माता की सेवा करने वालों को अपराधी बनाया जा रहा है, जबकि गौ वध और तस्करी में लिप्त लोगों को व्यापारी कहा जा रहा है।
कानून सख्त, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
गौ वंश रक्षकों ने भारत सरकार के पशु क्रूरता अधिनियम 1960, छत्तीसगढ़ पशु क्रूरता अधिनियम (16 जुलाई 2024) और छत्तीसगढ़ गौवंश परिरक्षण अधिनियम 2004 का हवाला देते हुए कहा कि बार-बार अवैध गौ परिवहन होने पर संबंधित थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
बाजार बंद करने और सख्त कार्रवाई की मांग
गौ वंश रक्षक संगठनों ने करही-भदर पशु बाजार को तत्काल बंद करने, गौ तस्करों पर अधिनियम की धारा 5(A), 5(B), 5(C), 5(D) के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि गौ सेवकों के साथ न्याय नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
