अयोध्या के राम मंदिर दान राशि मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है. इस विवाद में मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है. एसआईटी के गठन के बाद छत्तीसगढ़ विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, अयोध्य राम मंदिर विवाद में एसआईटी टीम की जांच से सच्चाई सामने आएगी.
उन्होंने कहा, “हमने राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट से जानकारी प्राप्त की. जिस समय वहां कि व्यवस्थाएं स्थापित हो रही थीं उस समय भी चर्चा हुई थी और प्रयत्न यह किया गया था कि एक ऐसी व्यवस्था बना दी जाए जिसमें सुरक्षा के सारे प्रबंध हो और चूक न हो. तब हमें बताया गया था कि उस प्रक्रिया को सीसीटीवी के सामने किया जाएगा जो कि किया था.”

राम मंदिर दान राशि विवाद पर क्या बोले आलोक कुमार?
उन्होंने आगे कहा कि दो पर्यवेक्षक भी बनाए गए थे और उस समय एक विशेषज्ञ ने आश्वासन दिया था कि यह व्यवस्था लागू होने की वजह से वहां ठीक से पैसा गिना जा सकेगा और रिकॉर्ड किया जा सकेगा. जो किया भी गया. अब जब मामले को लेकर खबरें आने शुरू हुईं तो लगा कि केवल इंटरनल ऑडिट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.
उन्होंने कहा, “अगर संदेह भी है तो उसका निवारण होना चाहिए. इसलिए तीर्थक्षेत्र ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय में एसआईटी बनाई जाए. मुख्यमंत्री ने हमारे आग्रह को स्वीकार किया.” उन्होंने बताया कि जिन तीन लोगों की एसआईटी बनी है वे उच्च पदस्थ लोग हैं और उसमें पुलिस के जो अधिकारी हैं उनको ऑटोनॉमिक और वित्तीय अपराध को जांच करने का एक लंबा बड़ा अध्यन है.
आलोक कुमार ने आगे कहा, “तीर्थक्षेत्र ने बताया है कि उनके अनुरोध पर एसआईटी का गठन हुआ है. जांच में पूरा सहयोग देंगे. इस मामले का जो भी सच है उस तक पहुंचना है. अगर कोई लोग दोषी पाए जाते हैं तो कानून के रास्ते से पर्याप्त और कड़े से कड़ा दंड मिलना चाहिए.” उन्होंने कहा, “राम जी के एक-एक पैसे के लिए ट्रस्ट अपने उत्तरदायित्व को स्वीकार करता है. इस मामले की तय तक पहुंचकर जो कुछ भी होगा उसको आखिर तक लेकर जाएंगे.”
