दुनिया भर में सामान पहुंचाने के लिए विशालकाय समुद्री जहाज सबसे भरोसेमंद जरिया माने जाते हैं. अक्सर हम कारों या बाइकों के माइलेज की बात करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि समुद्र की लहरों को चीरने वाले इन महाकाय जहाजों का माइलेज कितना होता होगा. खासतौर से जब ईंधन के रूप में एलएनजी का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसकी दक्षता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. एक विशाल मालवाहक जहाज का माइलेज सुनने में बहुत कम लग सकता है, लेकिन जब इसे इसके द्वारा ढोए जाने वाले हजारों टन वजन के साथ जोड़कर देखा जाता है, तो यह परिवहन का सबसे किफायती तरीका बनकर उभरता है. आइए जानते हैं कि एक गैलन एलएनजी में एक शिप कितनी दूरी तय कर पाता है और इसके पीछे विज्ञान क्या कहता है.
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अगर तकनीकी आंकड़ों की बात करें तो एक गैलन एलएनजी का उपयोग करके एक बड़ा कार्गो शिप लगभग 0.23 से 0.46 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है. इसे सरल भाषा में समझें तो एक गैलन ईंधन में यह जहाज सिर्फ 230 से 460 मीटर ही आगे बढ़ पाता है.
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विशालकाय समुद्री जहाजों का माइलेज उनके भारी-भरकम वजन और महासागर के पानी के प्रतिरोध के कारण प्रति गैलन बहुत ही कम होता है. जहां एक आम कार एक लीटर में कई किलोमीटर चलती है, वहीं ये समुद्री दानव कुछ ही मीटर चलने में गैलन भर ईंधन पी जाते हैं.
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जहाज का माइलेज उसके आकार और उस पर लदे हुए सामान पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है. बड़े मालवाहक पोत और एलएनजी वाहक लाखों टन वजनी होते हैं, जिसके कारण उनके इंजन को चलाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की जरूरत पड़ती है.
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जहाज पर लदे हुए कंटेनरों का वजन जितना अधिक होगा, इंजन की ईंधन खपत उतनी ही बढ़ती चली जाएगी. यही वजह है कि खाली जहाज की तुलना में पूरी तरह से लदा हुआ शिप बहुत कम माइलेज देता है.
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जहाज की दक्षता सिर्फ इंजन पर ही नहीं बल्कि प्राकृतिक परिस्थितियों पर भी टिकी होती है. समुद्र में उठने वाली तूफानी लहरें और हवा का विपरीत दबाव जहाज की गति को धीमा कर देते हैं और इंजन पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं.
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ऐसी स्थिति में जहाज का माइलेज सामान्य से काफी कम हो जाता है. इसके विपरीत शांत समुद्र में जहाज अपनी पूरी क्षमता और बेहतर माइलेज के साथ सफर तय कर पाता है.
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समुद्री यात्रा के दौरान जहाज की रफ्तार माइलेज तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है. आमतौर पर बड़े कार्गो शिप 22 से 37 किलोमीटर प्रति घंटा की किफायती गति से चलते हैं. इस रफ्तार पर ईंधन की खपत सबसे संतुलित और अनुकूल होती है. अगर जहाज को बहुत तेज गति से चलाया जाए, तो ईंधन की खपत अचानक कई गुना बढ़ जाती है और माइलेज बुरी तरह गिर जाता है.
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भले ही एक गैलन में जहाज कुछ सौ मीटर ही चलता हो, लेकिन यह ट्रकों के मुकाबले 14 गुना ज्यादा ईंधन-दक्ष होता है. एक बड़ा कंटेनर जहाज एक बार में हजारों कंटेनर ढोता है, इसलिए प्रति कंटेनर के हिसाब से इसका खर्चा बहुत कम बैठता है.
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टन-माइल दक्षता के हिसाब से देखें तो जहाज एक गैलन ईंधन में लगभग 183 से 390 कंटेनर-मील की दूरी तय कर लेते हैं. वहीं एक लंबी दूरी का ट्रक केवल 7 से 15 कंटेनर-मील प्रति गैलन ही दे पाता है.
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एक बड़े कंटेनर जहाज की ईंधन टैंक क्षमता आपको हैरान कर सकती है. इन जहाजों में एक बार में 30 लाख से 55 लाख गैलन तक ईंधन भरा जा सकता है. आजकल पारंपरिक समुद्री ईंधन की जगह एलएनजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है.
