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Iran Us War: अमेरिका के इतने हमलों के बाद भी कैसे सर्वाइव कर रही ईरान नेवी, जानें कितनी बड़ी फोर्स?

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Iran Us War: अमेरिका और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों और लगातार सैन्य दबाव के बाद भी ईरान की नौसेना खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनी हुई है. पूरी दुनिया को तेल सप्लाई करने वाले सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते यानी होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दबदबा आज भी कायम है. सिर्फ 90 मिलियन की आबादी वाले इस देश ने अपनी सैन्य ताकत को इस तरह डिजाइन किया है कि महाशक्तियां भी इससे सीधे टकराने से बचती हैं. ईरान की यह अनोखी समुद्री ताकत और उसकी सेना का ढांचा किसी को भी हैरान कर सकता है. आइए जानें कि अमेरिका के इतने हमलों के बाद भी ईरान की फोर्स कितनी ताकतवर है.

2 हिस्सों में बंटी ईरान की ताकत

ईरान की रक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी दोहरी सैन्य प्रणाली है. ईरान की सेना मुख्य रूप से दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित होकर देश की सुरक्षा संभालती है. पहली है वहां की नियमित सेना, जिसे Artesh कहा जाता है और दूसरी है IRGC यानी इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स. आईआरजीसी को ईरान की सबसे खतरनाक और वफादार स्पेशल फोर्सेज माना जाता है. नियमित सेना के तहत थल सेना, नेवी, एयर फोर्स और एयर डिफेंस फोर्स काम करती हैं, जो देश की सीमाओं की पारंपरिक तरीके से रक्षा करती हैं.

सेना और नौसेना की कुल संख्या

अगर सैनिकों की कुल संख्या की बात करें तो ईरान के पास 1 मिलियन 60,000 सैनिकों की एक विशाल फौज मौजूद है. इसमें से नियमित थल सेना में 350,000 सैनिक, एयर फोर्स में 37,000, एयर डिफेंस फोर्स में 15,000 और नियमित नेवी में 18,000 सैनिक शामिल हैं. दूसरी तरफ IRGC की जमीनी सेना में 150,000, एयरोस्पेस में 15,000, कुद्स फोर्स में 5,000 और इसकी अपनी खतरनाक नेवी में 20,000 जवान तैनात हैं. इन सबके अलावा ईरान के पास 450,000 सैनिकों की एक बहुत बड़ी रिजर्व फोर्स भी हमेशा तैयार रहती है.

 

 

समुद्री मोर्चे पर दोहरी सुरक्षा दीवार

ईरान ने अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना को भी दो हिस्सों में बांट रखा है. पहली है इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नेवी (IRIN) जो गहरे समुद्र और फारस की खाड़ी में पारंपरिक अभियानों को संभालती है. दूसरी है IRGC नेवी, जिसके पास 18,500 से 20,000 के करीब बेहद आक्रामक सक्रिय नौसैनिक हैं. यह अर्धसैनिक नौसेना तटीय रक्षा करने, मिसाइल-लॉन्चिंग स्पीड बोट्स चलाने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक रास्तों पर अपनी कड़ी नजर रखने में पूरी तरह माहिर मानी जाती है.

पनडुब्बियों और युद्धपोतों का बड़ा बेड़ा

इतने बड़े घेराव के बाद भी ईरान के पास लगभग 90 से 100 छोटे-बड़े युद्धपोत और पनडुब्बियों का एक मजबूत बेड़ा आज भी एक्टिव है. ईरान की अंडरवाटर ताकत में 18 से 21 पनडुब्बियां शामिल हैं, जिनमें रूस से खरीदी गई किलो-श्रेणी की पनडुब्बियां और ईरान में ही बनी ‘गदीर’ और ‘फतेह’ श्रेणी की आधुनिक पनडुब्बियां मुख्य हैं. इसके अलावा खाड़ी में दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए उनके पास लगभग 100 तेज हमलावर स्पीड बोट्स और आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से लैस गश्ती जहाज मौजूद हैं.

असममित युद्ध नीति से मुकाबला

अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के सामने टिके रहने के लिए ईरान गहरे समुद्र में पारंपरिक युद्ध लड़ने के बजाय ‘असममित युद्धनीति’ का इस्तेमाल करता है. इसका मतलब है कि वह दुश्मन के बड़े जहाजों पर अपनी सैकड़ों छोटी, तेज और मिसाइलों से लैस स्पीड बोट्स से एक साथ हमला करता है. अपने तटीय इलाकों की भौगोलिक स्थिति, संकीर्ण समुद्री रास्तों की समझ और खतरनाक क्रूज मिसाइलों की बदौलत ईरान की नेवी को पूरे खाड़ी क्षेत्र में सबसे घातक और प्रभावी समुद्री ताकतों में गिना जाता है.

हालिया तनाव और एयर बेस पर हमला

ईरान और अमेरिका के बीच का यह तनाव हाल ही में तब और बढ़ गया जब आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने एक बड़े एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया. ईरान का कहना है कि इसी बेस का इस्तेमाल सीरिक द्वीप पर मौजूद एक टेलीकॉम टावर पर अमेरिकी हमले के लिए किया गया था. हालांकि ईरान ने इस बेस के सटीक लोकेशन की जानकारी नहीं दी, लेकिन यह दावा ठीक उस समय सामने आया जब कुवैत की तरफ से यह रिपोर्ट आई कि उस पर मिसाइल और ड्रोन के जरिए हमला किया गया है.

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