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कनाडा ने रोका अमेरिका जाने वाला रक्षा फंड, क्या और भी देश अमेरिकी सेना को भेजते हैं पैसा?

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US Military Funding: एक बड़े रणनीतिक बदलाव के तहत कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यह संकेत दिया है कि कनाडा अब अपने रक्षा खर्च का 70% अमेरिकी कंपनियों की तरफ नहीं भेजेगा. इस कदम का उद्देश्य कनाडा के अपने रक्षा उद्योग को मजबूत करना और संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भरता को कम करना है. लेकिन इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या दूसरे देश भी अमेरिकी सेना को पैसे भेजते हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

कनाडा अपने रक्षा खर्च पर दोबारा विचार क्यों कर रहा है? 

दरअसल कनाडा के इस फैसले की जड़ में आत्मनिर्भरता का विचार है. सालों से उसके रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी हथियार और प्रणालियों को खरीदने में खर्च होता रहा है. अब ओटावा उस खर्च को घरेलू उत्पादन की तरफ मोड़ना चाहता है. ऐसा इसलिए ताकि रोजगार बढ़ें और उसकी अपनी सैन्य क्षमता विकसित हो.

एक और बड़ी वजह निर्भरता को कम करना है. अमेरिकी रक्षा आपूर्तिकर्ता पर काफी ज्यादा निर्भर रहने से वैश्विक तनाव या फिर व्यापारिक विवाद के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. स्थानीय स्तर पर निवेश करके कनाडा एक निश्चित भू राजनीतिक माहौल में अपनी सैन्य स्वतंत्रता को सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है.

 

 

क्या देश सीधे तौर पर अमेरिकी सेना को फंड देते हैं?

आमतौर पर अमेरिका दूसरे देशों को सैन्य सहायता देता है. हालांकि कई मामलों में देश आर्थिक रूप से योगदान देते हैं. ये योगदान आमतौर पर लागत साझेदारी, बुनियादी ढांचे का समर्थन या फिर रक्षा खरीद के रूप में दिए जाते हैं.

अमेरिकी सैनिकों के लिए भुगतान 

जिन देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे होते हैं वे अक्सर उनके रखरखाव का आर्थिक बोझ साझा करते हैं. जैसे जापान वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों के समर्थन के लिए सालाना लगभग 2 बिलियन डॉलर का योगदान देता है. इसमें उपयोगिता,  स्थानीय कर्मचारियों के वेतन और बुनियादी ढांचे की लागत शामिल है. ठीक इसी तरह दक्षिण कोरिया रक्षा समझौते के तहत हर साल $1 बिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि देता है.

जर्मनी का आर्थिक समर्थन 

जर्मनी भी काफी योगदान देता है. लेकिन यह योगदान अप्रत्यक्ष रूप से होता है. वह अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बुनियादी ढांचे, हवाई अड्डे और उपयोगिता के रखरखाव पर सालाना एक बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करता है. इसके अलावा वह टैक्स छूट और जमीन तक पहुंच भी देता है. इससे अमेरिकी सेना की लागत कम हो जाती है.

रक्षा खरीद 

सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देश के साथ कई देश अमेरिका से अरबों डॉलर के हथियार खरीदते हैं. यह खरीद सीधे तौर पर अमेरिकी सेना को फंड नहीं देती बल्कि अमेरिकी रक्षा उद्योग को जोरदार समर्थन देती है. इसी के साथ नाटो के तहत सदस्य देश अपनी आर्थिक क्षमता के आधार पर एक साझा बजट में योगदान देते हैं. अमेरिका और जर्मनी दोनों ही नाटो की परिचालन लागत में लगभग 16% का योगदान देते हैं. इसी तरह बाकी सदस्य भी सामूहिक रक्षा का भार साझा करते हैं.

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