छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हाल ही में रेप के गंभीर मामले में दोषी की सजा बदलकर उसे राहत दी है. कोर्ट का कहना है कि पुरुष के प्राइवेट ऑर्गन को महिला के निजी अंग के पास रखना और बिना पेनिट्रेशन के इजैक्यूलेट करना ‘रेप’ की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि इसे ‘रेप की कोशिश’ कहा जा सकता है. ऐसे में दोषी को अटेम्पट टू रेप की धाराओं के तहत सजा होगी.
यह सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने की. हियरिंग के बाद कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रेप के जुर्म के लिए जरूरी शर्त ‘पेनिट्रेशन’ है ‘इजैक्यूलेशन’ नहीं. अगर केवल इजैक्यूलेशन है तो यह अटेम्पट की श्रेणी में ही आएगा.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार वकील की ओर से कहा गया है कि आरोपी ने जबरन पीड़िता का हाथ पकड़ा, उसे अपने घर ले गया. उसके कपड़े उतारे, उसकी मर्जी के बिना सेक्स किया और फिर उसे एक कमरे में बंद कर दिया. पीड़िता के हाथ-पैर बांधे गए, उसके मुंह में कपड़ा तक ठूस दिया गया. एफआईआर के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई. धमतरी के एडिशन सेशंस जज ने उसे IPC की धारा 376 और 342 के तहत दोषी करार दिया था.

डॉक्टर्स ने मेडिकल टेस्ट में क्या पाया था?
इस सजा के खिलाफ आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील की. ट्रायल में पीड़िता ने बताया था कि आरोपी ने पेनीट्रेशन किया. हालांकि, बाद में बताया कि उसने 10 मिनट तक पेनिस को ऊपर रखा था. डॉक्टर्स ने भी मेडिकल टेस्ट में पाया था कि पीड़िता का हाइमन ब्रेक नहीं हुआ है. इसके चलते रेप की पुष्टि नहीं होती.
जस्टिस व्यास ने बताया कि साल 2013 के अमेंडमेंट से पहले धारा 375 के मुताबिक, रेप के जुर्म के लिए पेनिट्रेशन जरूरी था. धारा 376 के तहत सजा के लिए हल्का पेनिट्रेशन भी मायने रखता है. इसलिए यह साफ है कि रेप के जुर्म के लिए पेनिट्रेशन जरूरी है. हालांकि, इसे साबित करने के लिए साफ और ठोस सबूत चाहिए.
ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करेगा दोषी
नतीजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि यह आरोपी विक्टिम को जबरदस्ती कमरे में ले गया, सेक्स के इरादे से दरवाजा बंद किया. यह जुर्म करने की तैयारी का आखिरी कदम था. आरोपी ने जानबूझकर इंटरकोर्स करने की कोशिश की थी. उसका मकसद जुर्म करना था और यह जुर्म पूरा होने के करीब था. कोर्ट ने अपीलकर्ता की दोषसिद्धि बरकरार रखी है. कोर्ट ने उसे 3 साल 6 महीने की सजा सुनाई और 200 रुपये जुर्माना लगाया. क्योंकि दोषी अभी जमानत पर है इसलिए उसे बाकी की सजा पूरा करने के लिए ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है.
