दुनिया में पासपोर्ट सिर्फ यात्रा के लिए एक कागज नहीं, बल्कि किसी देश की ताकत और उसकी कूटनीति की पहचान होता है. ऐसे माहौल में जब वीजा नियम सख्त हो रहे हैं, बांग्लादेश ने अचानक एक ऐसा कदम उठाया जिसने सबको चौंका दिया. सवाल उठने लगे कि क्या उसका पासपोर्ट अब मजबूत हो रहा है या तस्वीर अभी भी वैसी ही है? और भारत के मुकाबले वह कहां खड़ा है? आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं.
पासपोर्ट की ताकत का असली पैमाना क्या?
किसी भी देश के पासपोर्ट की मजबूती इस बात से मापी जाती है कि उसके नागरिक कितने देशों में बिना पहले से वीजा लिए जा सकते हैं. इसमें दो तरह की सुविधा गिनी जाती है- वीजा फ्री एंट्री और वीजा ऑन अराइवल. हर साल लंदन की ग्लोबल सिटिजनशिप फर्म Henley & Partners अपनी मशहूर Henley Passport Index जारी करती है, जो इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के डेटा पर आधारित होती है.
फरवरी 2026 के ताजा अपडेट के मुताबिक बांग्लादेशी पासपोर्ट धारक करीब 37 से 42 देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा पा सकते हैं. यही संख्या किसी पासपोर्ट की वैश्विक पहुंच को तय करती है.
बांग्लादेश का पासपोर्ट कितनी पहुंच देता है?
आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश का पासपोर्ट दुनिया की रैंकिंग में 93वें से 97वें स्थान के बीच आता है. इसका मतलब है कि उसके नागरिकों को यात्रा के लिए सीमित देशों में ही आसानी मिलती है. इन 37-42 देशों में ज्यादातर अफ्रीका, कैरिबियन और एशिया के कुछ छोटे या मध्यम देशों का नाम शामिल है. यूरोप, उत्तरी अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े और विकसित देशों में बांग्लादेशी नागरिकों को पहले से वीजा लेना पड़ता है.
हाल ही में बांग्लादेश ने उत्तर कोरिया के नागरिकों के लिए वीजा में ढील देकर कूटनीतिक हलकों में हलचल जरूर मचाई, लेकिन इससे उसके पासपोर्ट की कुल वैश्विक रैंकिंग पर कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है.

भारत का पासपोर्ट कितनी रैंकिंग पर?
अब अगर भारत की बात करें तो भारतीय पासपोर्ट की स्थिति बांग्लादेश के मुकाबले बेहतर है. फरवरी 2026 तक भारतीय पासपोर्ट धारक 56 देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा पा सकते हैं. रैंकिंग की बात करें तो भारत लगभग 75वें स्थान पर है, जो बांग्लादेश से काफी ऊपर है. इसका मतलब साफ है कि भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा में अपेक्षाकृत ज्यादा सहूलियत मिलती है.
भारतीय पासपोर्ट की बेहतर स्थिति को भारत के मजबूत कूटनीतिक संबंधों और बढ़ती आर्थिक ताकत से भी जोड़ा जाता है. पिछले कुछ सालों में कई देशों ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियम आसान किए हैं, खासकर पर्यटन और बिजनेस यात्रा के लिए.
फर्क कितना बड़ा है?
अगर सीधी तुलना करें तो भारत को बांग्लादेश से करीब 14 से 19 ज्यादा देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है. रैंकिंग में भी करीब 15 से 20 स्थान का अंतर है. यह अंतर सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भरोसे, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की झलक भी है. पासपोर्ट की ताकत इस बात का संकेत देती है कि किसी देश के नागरिकों पर दुनिया कितना भरोसा करती है और उस देश के साथ उसके रिश्ते कितने मजबूत हैं.
