जस्थान के जयपुर से वोटर लिस्ट अपडेट प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. झोटवाड़ा इलाके के रघुनाथपुरी वार्ड नंबर 33 का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के कुछ युवक एक महिला BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) से बहस करते दिखाई दे रहे हैं.
युवकों का आरोप है कि BLO ने फॉर्म देने के लिए उनके घरों का दौरा नहीं किया और जानबूझकर उनके परिवार के नाम वोटर लिस्ट से काटने की कोशिश की जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
वीडियो में दो युवक आसिफ और मकबूल महिला BLO सविता मिथिलेश से सवाल पूछते दिखाई दिए. वे आरोप लगाते हैं कि BLO उनके घर फॉर्म देने नहीं आईं है. साथ ही वोटर लिस्ट में उनके और कई परिवारों के नाम के आगे मार्किंग की गई है. यह किसी इशारे पर पूरी कम्युनिटी का नाम काटने की साजिश हो सकती है.
युवकों का कहना है कि BLO इलाके में एक निश्चित स्थान पर बैठकर लोगों से खुद फॉर्म लेने आने की अपेक्षा करती हैं. उनका आरोप है कि जो लोग फॉर्म लेने नहीं पहुंचते, उनके नाम काट दिए जा रहे हैं. यह बात सामने आई कि BLO के पास जो वोटर लिस्ट है, उसमें समुदाय विशेष के कई नामों पर निशान लगे हुए हैं.

सवालों के बाद महिला BLO ने साधी चुप्पी
जब युवकों ने सवाल पूछने शुरू किए, तो महिला BLO पहले चुप्पी साधे रहीं. बाद में उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे फॉर्म देने गई थीं, लेकिन जब युवकों ने बार-बार कहा कि वे घर नहीं आई थीं, तो वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाईं. सवालों से घिरी BLO ने कहा कि वह किसी सवाल का जवाब नहीं देंगी और यह भी कहा कि वह सरकारी कर्मचारी हैं. पूरा घटनाक्रम युवकों ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया.
कांग्रेस ने भी शेयर किया वीडियो
मामला तब और राजनीतिक हो गया जब यह वीडियो कांग्रेस पार्टी के ऑफिशियल X हैंडल पर शेयर किया गया. कांग्रेस ने लिखा, “लोगों के नाम टारगेट कर काटे जा रहे हैं, SIR के नाम पर खेल हो रहा है. वोट का अधिकार छीनना संविधान पर हमला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
विवाद के बाद बढ़ा मामला
इस वीडियो के सामने आने के बाद क्षेत्र में बहस छिड़ गई है. आरोप है कि वोटर लिस्ट में SIR (Special Summary Revision) के नाम पर खास समुदाय को टारगेट किया जा रहा है. मामला अब सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बन चुका है. फिलहाल यह वीडियो जयपुर में चुनावी तैयारियों और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है और लोकल प्रशासन से कार्रवाई की मांग भी की जा रही है.
