सतत कृषि की दिशा में धमतरी प्रशासन की पहल – ग्रीष्मकालीन धान की जगह दलहनी, तिलहनी व मक्का फसलों को प्रोत्साहन
धमतरी/ 8 नवम्बर जिले में जल संरक्षण और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशासन ने फसल चक्र परिवर्तन अभियान को नई रफ्तार दी है। अब किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के बजाय कम जल मांग वाली फसलों — जैसे दलहनी, तिलहनी, लघु धान्य और मक्का — की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जल स्तर गिरने पर चिंता, प्रशासन ने अपनाई नई रणनीति
धमतरी जिले के 1,58,180 कृषक कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। जिले में मुख्य सिंचाई साधन नहरें हैं, लेकिन करीब 30 हजार नलकूपों के माध्यम से भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा है, जिससे जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।
इसी स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को एक साथ जोड़ते हुए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है।

प्रत्येक ब्लॉक के 10 गांवों में 100% फसल चक्र परिवर्तन का लक्ष्य
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कृषि अधिकारियों और मैदानी अमले की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर विकासखंड के कम से कम 10 गांवों में शत-प्रतिशत फसल चक्र परिवर्तन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि धान के स्थान पर दलहनी, तिलहनी व मक्का फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन और सम्मान दिया जाएगा।
गांव-गांव में जागरूकता और बीज वितरण शिविर
फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव पारित किए जा रहे हैं। कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि गांव-गांव में जागरूकता शिविर, ऋण और बीज वितरण शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि किसान योजनाओं का लाभ उठा सकें।
39 सहकारी समितियों में बीजों की उपलब्धता
कृषि विभाग ने जिले की 39 प्राथमिक साख सहकारी समितियों में पर्याप्त बीज भंडारण किया है। अब तक समितियों में उपलब्ध हैं –
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गेहूं: 32.10 क्विंटल
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चना: 296.70 क्विंटल
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तिवड़ा: 22.10 क्विंटल
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सरसों: 52 क्विंटल
किसानों से अपील
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी सहकारी समितियों और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क कर मार्गदर्शन लें।
कम जल मांग वाली फसलों की ओर बढ़कर किसान जल संरक्षण, उत्पादन में विविधता और आयवृद्धि — तीनों में योगदान दे सकेंगे।
