World Most Powerful Passport: दुनियाभर में बढ़ती भारत की धमक के बीच पासपोर्ट के मोर्चे पर एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. रेजीडेंसी और सिटीजनशिप एडवाइजरी फर्म ग्लोबल सिटिन सॉल्यूशंस ने अपने ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स का पांचवां सालाना संस्करण जारी कर दिया है. इस नई रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पासपोर्ट की ताकत में गिरावट दर्ज की गई है और इस रिपोर्ट में भारत नीचे खिसककर 125वें स्थान पर पहुंच गया है. यह रैंकिंग साल 2025 के मुकाबले एक पायदान नीचे की ओर है. इस वैश्विक सूची में स्वीडन पहले स्थान पर है, वहीं अफगानिस्तान सबसे आखिरी पायदान पर है. चलिए जानें कि ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स रैंकिंग कैसे तय होती है.
क्या होती है किसी पासपोर्ट की रैंकिंग?
आम बोलचाल की भाषा में समझा जाए तो पासपोर्ट की रैंकिंग का मतलब होता है कि उस देश के नागरिक दुनिया के कितने देशों में बिना किसी एडवांस वीजा के यात्रा कर सकते हैं. यह रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश के आम नागरिक को मिलने वाली सहूलियत और सम्मान का पैमाना होती है. इसे मापने के लिए दुनियाभर में अलग-अलग संस्थाएं अपनी रिपोर्ट जारी करती हैं. इसमें हेनले एंड पार्टनर्स का हेनले पासपोर्ट इंडेक्स भी मशहूर है, जो इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आधिकारिक आंकडों का इस्तेमाल करके दुनिया भर के पासपोर्ट की मजबूती तय करता है.
वीजा फ्री और ऑन-अराइलव एंट्री का मुख्य आधार
किसी भी देश के पासपोर्ट को दुनिया में कितनी तवज्जो मिलेगी, इसके लिए कुछ तय नियम और पॉइंट सिस्टम होते हैं. इसका सबसे पहला और बड़ा पैमाना है वीजा फ्री एंट्री. यानी जिस देश में जाने के लिए भारतीयों को पहले से कोई कागजी कार्रवाई न करनी पड़े और वहां पहुंचते ही एंट्री मिल जाए, उस हर देश के बदले पासपोर्ट को एक पॉइंट मिलता है. दूसरा आधार है वीजा-ऑन-अराइवल, जिसमें यात्रा करने वाले देश के एयरपोर्ट पर उतरते ही तुरंत वीजा दे दिया जाता है. इसके लिए भी रैंकिंग में एक अंक जोड़ दिया जाता है.

ई-वीजा और कूटनीतिक समझौते
आज के डिजिटल युग में रैंकिंग तय करने के लिए ई-वीजा और ईटीए (इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन) की प्रक्रिया को भी देखते हैं. अगर किसी देश के लिए ऑनलाइन वीजा मिलना बहुत आसान और तेज है तो उसे रैंकिंग में सकारात्मक माना जाता है. वैश्विक स्तर पर यह इंडेक्स कुल 199 पासपोर्टों की तुलना दुनिया के 227 संभावित यात्रा गंतव्यों से करता है. जिस देश के पास जितने ज्यादा वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल देशों के पॉइंट होते हैं, वह इस वैश्विक सूची में उतना ही ऊपर और मजबूत स्थिति में दिखाई देता है.
अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता
पासपोर्ट की असली ताकत सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि लोग कहां घूमना चाहते हैं, बल्कि इसके पीछे उस देश की कूटनीति और अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी वजह होती है. दो देशों के बीच मजबूत व्यापारिक समझौते, सुरक्षा को लेकर आपसी तालमेल और देश के भीरत राजनीतिक स्थिरता इसमें अहम भूमिका निभाती है. जब कोई देश आर्थिक रूप से समृद्ध और सुरक्षित माना जाता है, तो दुनिया के दूसरे देश वहां के नागरिकों पर भरोसा जताते हुए अपने दरवाजे खोल देते हैं. यही वजह है कि अमीर और विकसित देशों के पासपोर्ट हमेशा टॉप पर रहते हैं.
