धमतरी/ साल्हेवार पारा स्थित कथित “गांड़ा बस्ती” में 86 किलो गौमांस बरामदगी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मूल छत्तीसगढ़िया गांड़ा समाज ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही बस्ती में निवासरत लोगों की जाति की जांच एवं सत्यापन कराने की मांग को लेकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है।
समाज की ओर से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धमतरी जिले की कथित गांड़ा बस्ती से 86 किलो गौमांस बरामद किया गया था। मामले में आरोपी संत राम बघेल को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
समाज ने कहा- हमारी छवि को पहुंची ठेस
मूल छत्तीसगढ़िया गांड़ा समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि इस घटना को गांड़ा समाज से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने से पूरे समाज की छवि धूमिल हुई है। उनका दावा है कि गांड़ा समाज की पारंपरिक पहचान कोटवारी, बुनकरी, पशुपालन तथा बढ़ादेव एवं बुद्धादेव पूजा अवसरों पर वाद्य यंत्र बजाने जैसे कार्यों से जुड़ी रही है।
समाज का कहना है कि मृत पशुओं की खाल निकालने की परंपरा उनके किसी भी घटक में नहीं है। आवेदन में समाज के विभिन्न घटकों—अंधकुरी, देवदास, गंधर्व, कोसरिया, झरिया, चौहान, फुलझर एवं सकतहा—के पदाधिकारियों का हवाला देते हुए कहा गया है कि साल्हेवार पारा की उक्त बस्ती में मूल गांड़ा समाज के लोग निवास नहीं करते हैं।

जाति सत्यापन की उठाई मांग
ज्ञापन में दावा किया गया है कि बस्ती में रहने वाले कुछ लोग मूलतः ओडिशा से मजदूरी की तलाश में आकर बसे हैं और वे स्वयं को गांड़ा समाज का सदस्य बताकर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। समाज ने आरोप लगाया है कि उनकी वास्तविक जाति की प्रशासनिक जांच कराई जाए तथा सत्यापन कराया जाए।
समाज ने मांग की है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बस्ती में गांड़ा समाज का कोई सदस्य निवास नहीं करता, तो उस क्षेत्र को “गांड़ा बस्ती” के नाम से संबोधित नहीं किया जाना चाहिए और उसका नाम परिवर्तन किया जाए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
मूल छत्तीसगढ़िया गांड़ा समाज ने प्रशासन से मांग की है कि गौमांस तस्करी अथवा अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उनकी जाति की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि समाज की प्रतिष्ठा और पहचान को नुकसान न पहुंचे।
समाज ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सत्य सामने लाया जाए और दोषियों पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
