धमतरी/ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) के लिए हाल ही में एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए कैमरा ट्रैप से प्राप्त वीडियो और तस्वीरों में एक बाघिन की नियमित मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग के अनुसार यह बाघिन संभवतः प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए उदंती-सीतानदी के वनों तक पहुंची है और अब इस क्षेत्र को अपना नया घर बना रही है।
लंबे समय से बाघों की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे उदंती-सीतानदी के लिए यह घटना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। बाघिन का आगमन केवल एक वन्यजीव की उपस्थिति नहीं, बल्कि पूरे वन परिदृश्य के पुनर्जीवन और संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत माना जा रहा है।
कैमरा ट्रैप में कैद हुई तस्वीरों और वीडियो में बाघिन स्वस्थ एवं आत्मविश्वास के साथ अपने क्षेत्र में विचरण करती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि वह यहां अपना क्षेत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है।
वनकर्मियों, संरक्षणवादियों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच इस खबर ने नया उत्साह भर दिया है। बाघिन द्वारा उदंती-सीतानदी को अपना निवास क्षेत्र चुनना इस बात का प्रमाण है कि यह टाइगर रिजर्व पुनः एक सुरक्षित और समृद्ध बाघ आवास के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है।

उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि वन विभाग बाघिन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसके लिए अनुकूल आवास उपलब्ध कराने हेतु संरक्षण एवं प्रबंधन के प्रयासों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग का लक्ष्य उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को एक बार फिर मध्य भारत के प्रमुख बाघ परिदृश्यों में शामिल करना है।
उन्होंने कहा, “इस बाघिन की उपस्थिति केवल एक वन्यजीव की कहानी नहीं है, बल्कि यह आशा, पुनर्जीवन और प्रकृति की सकारात्मक प्रतिक्रिया का संदेश है। यह दर्शाता है कि उदंती-सीतानदी में किए गए संरक्षण प्रयास रंग ला रहे हैं और यह परिदृश्य एक बार फिर बाघों का सुरक्षित घर बनने की दिशा में अग्रसर है।”
वन्यजीव संरक्षण के लिए शुभ संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी क्षेत्र में बाघ की उपस्थिति वहां के वन, जल स्रोत और जैव विविधता की बेहतर स्थिति का संकेत होती है। ऐसे में उदंती-सीतानदी में बाघिन की मौजूदगी भविष्य में बाघों की संख्या बढ़ने और वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगा रही है।
