ओडिशा के 7 शिकारी गिरफ्तार, जंगल में जहर डालकर बाघ मारने की थी तैयारी, थर्मल ड्रोन से हो रही निगरानी
गरियाबंद/ छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में शामिल उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार की एक बड़ी और खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम ने ओडिशा के 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर एक अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह का खुलासा किया है। आरोपियों के कब्जे से जहर की शीशी, जहरीली मरी हुई मछलियां-केकड़े और हिरण के सींग बरामद किए गए हैं।
वन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी बाघ को जहर देकर मारने और उसकी खाल तस्करों तक पहुंचाने की तैयारी में थे। पूरे मामले के सामने आने के बाद वन विभाग ने पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ा दी गई है और थर्मल ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पांच दिन पहले ही बिछा दिया गया था सुरक्षा जाल
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कुछ दिनों पहले ओडिशा सीमा से लगे जंगलों में संदिग्ध गतिविधियों की गोपनीय सूचना मिली थी। सूचना इतनी गंभीर थी कि विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पहाड़ी और बीहड़ इलाकों में तीन विशेष चौकी और अस्थायी कैंप स्थापित कर दिए।
एंटी पोचिंग टीम लगातार जंगलों में गश्त कर रही थी। जंगल के भीतर आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जा रही थी। रात के समय विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा था। यही सतर्कता आखिरकार शिकारियों के गिरोह तक पहुंचने में सबसे बड़ी वजह बनी।
बाघ की खाल के लिए दिया गया था ‘ठेका’
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 9 मई को ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के खिपरीमाल निवासी 76 वर्षीय रमन हेरना को पकड़ा गया। उसके कब्जे से चीतल हिरण का सींग बरामद हुआ।
वन विभाग की पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि बाघ की खाल उपलब्ध कराने के लिए उसने कुसुमखूंटा गांव निवासी हिंगुल रावत को ‘ठेका’ दिया था। योजना यह थी कि बाघ को जंगल में जहर देकर या तीर-कमान से मार गिराया जाए और बाद में उसकी खाल निकालकर तस्करों तक पहुंचा दी जाए।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी लंबे समय से वन्यजीव तस्करी से जुड़े लोगों के संपर्क में थे। बाघ की खाल के बदले बड़ी रकम मिलने की बात भी सामने आ रही है। वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है।
जंगल के नाले में जहर डाल रहे थे शिकारी
रमन हेरना की निशानदेही पर वन विभाग की टीम कुसुमखूंटा गांव पहुंची। यहां जालंधर बागरती नामक व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। हालांकि उसने मुख्य आरोपी हिंगुल रावत के बारे में जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन जांच में उसका नाम संदिग्ध रूप से सामने आया।
इसी बीच 10 मई को एंटी पोचिंग टीम को एक और बड़ी सफलता मिली। पेट्रोलिंग के दौरान टीम ने कटफाड़ गांव के 6 लोगों को रानीबरझोला नाला क्षेत्र में जहर डालकर शिकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
बताया जा रहा है कि आरोपी नाले में जहर डालकर जंगली जानवरों और जल स्रोतों को दूषित कर रहे थे ताकि वहां आने वाले वन्यजीवों को आसानी से मारा जा सके। यह इलाका बाघ और हाथियों के नियमित विचरण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
मौके से क्या-क्या मिला?
वन विभाग की टीम ने मौके से कई संदिग्ध और खतरनाक सामग्री बरामद की है, जिनमें शामिल हैं—
जहर की शीशी
जहरीली मरी हुई मछलियां
केकड़े
हिरण के सींग
शिकार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री
वन विभाग ने जब्त जहर को जांच के लिए रायपुर स्थित एफएसएल लैब भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
रमन हेरना
बुधराम पहरिया
अनंतराम पहरिया
मनलाल पहरिया
दिगसन पहरिया
धनु चिड़ा
मधुराम पहरिया
सभी आरोपी ओडिशा के अलग-अलग गांवों के निवासी बताए गए हैं।
पूरे टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट
घटना सामने आने के बाद उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। सीमा क्षेत्रों में चौकियां बढ़ाई गई हैं। जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
वन विभाग अब थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद से रात में भी जंगलों की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कहा है कि बाघों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
7 साल तक की हो सकती है सजा
सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
रमन हेरना को 11 मई को और बाकी 6 आरोपियों को 12 मई को राजिम स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अदालत में पेश किया गया।
अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। वन विभाग के मुताबिक, इस मामले में आरोप सिद्ध होने पर आरोपियों को 7 साल तक की सजा हो सकती है।
संयुक्त कार्रवाई से टूटा शिकारी गिरोह
इस बड़े अभियान में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम, ओडिशा के खरियार वनमंडल और गरियाबंद पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।
वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे वन्यजीव तस्करी का बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है।






