अवैध धर्मांतरण रोकने राज्य सरकार ने नया कानून बनाया है, जिसे विधानसभा में ध्वनि मत से पारित भी कर दिया गया है. लेकिन अब इस कानून का विरोध हो रहा है. सोमवार (23 मार्च) को बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर मूल निवासी मंच और राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के बैनर तले क्रिश्चियन समुदाय के लोगों ने महामहिम राज्यपाल के नाम बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस कानून को वापस लेने की मांग की है. क्रिश्चियन समुदाय के लोगों ने इस कानून को काला कानून बताया है.
उनका आरोप है कि इस कानून को भारतीय संविधान के विपरीत में अधिनियम पारित किया गया है. जिसका बस्तर मूल निवासी मंच और राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा पुरजोर विरोध करता है. अगर जल्द ही इस कानून को वापस नहीं लिया जाता है तो पूरे छत्तीसगढ़ में मसीह समुदाय के लोग इस कानून के विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे.
बस्तर भीम आर्मी ने भी इस विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया
दरअसल सोमवार को भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बैनर तले क्रिश्चियन समुदाय के लोगों ने सरकार द्वारा अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाए गए इस कानून के विरोध में रैली निकाली और महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सोपा. बस्तर भीम आर्मी ने भी मसीह समाज के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर अपना समर्थन दिया.
राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष बलदेव मण्डावी ने कहा कि बस्तर संभाग में निवासरत मूल निवासी एसटी-एससी ओबीसी के मसीह समुदाय मानने वाले को आपत्ति है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 के रहते छत्तीसगढ़ राज्य में दिनांक 19 मार्च 2026 को पारित विधेयक छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम को निरस्त किया जाए.

क्रिश्चियन समुदाय के लिए है काला कानून
यह क्रिश्चियन समुदाय के लिए काला कानून है, इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. भारतीय संविधान के अनुसार सभी को धर्म चुनने का अधिकार है, उन्होंने कहा कि इस कानून को बनाते वक्त राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के पदाधिकारी से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया ,ना ही उनके साथ सरकार ने कोई बैठक की और ना ही उनकी राय ली गई जो कि सरासर गलत है. क्रिस्चन समाज अवैध धर्मांतरण का जरूर विरोध करता है लेकिन इस कानून में कई ऐसी वजह है जिससे क्रिश्चियन समुदाय के लोगों को आने वाले दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इस वजह से क्रिश्चियन समुदाय ने इस कानून को निरस्त करने की मांग की है.
लंबे समय से क्रिश्चियन समुदाय लड़ रहा अपने हक की लड़ाई
भारत मुक्ति मोर्चा के संभाग प्रभारी मनबोध बघेल का कहना है कि लंबे समय से क्रिश्चियन समुदाय के लोग अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा पहले से ही जाति आधारित जनगणना और ओबीसी की जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर बीजेपी द्वारा ओबीसी के साथ की जा रही धोखाधड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रही है.
साथ ही एससी-एसटी ओबीसी के समर्थन में सख्त यूजीसी बिल लागू करने के समर्थन में और 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से मुक्त कराने के समर्थन में राष्ट्रव्यापी चरण बंद आंदोलन कर रही है. उनका कहना है कि भारत मुक्ति मोर्चा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के द्वारा भारत के संविधान द्वारा दिए हुए संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत लगातार आंदोलन कर रहा है.
तीन दिनों में फैसला नहीं तो 28 मार्च को होगा धरना प्रदर्शन
सोमवार को भी अपनी इन मांगो को लेकर और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाए गए अवैध धर्मांतरण पर कानून के विरोध में मसीह समाज ने रैली निकाल कर कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया गया है और इस कानून को निरस्त करने की मांग की है. अगर पिछले तीन दिनों में सरकार के द्वारा कोई फैसला नहीं लिया जाता है तो आने वाले 28 मार्च को संभाग स्तरीय धरना प्रदर्शन किया जाएगा.
जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों के अलग-अलग संभाग में धरना प्रदर्शन करेंगे और फिर भी मांग पूरी नहीं होती है तो आंदोलन के चौथे चरण में आने वाले 23 अप्रैल को भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के तत्वाधान में भारत बंद किया जाएगा.
