बजट आते ही हर साल आम आदमी की नजर रसोई, पेट्रोल और मोबाइल बिल पर जाती है, लेकिन इस बार चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा कुछ और ही है. जो शराब की बोतल कल तक 500 में आराम से मिल जाती थी, क्या अब वही बोतल जेब पर भारी पड़ने वाली है? बजट 2026 के बाद शराब और सिगरेट के दामों को लेकर बाजार में तरह-तरह की बातें हो रही हैं. सवाल सीधा है कि इसके दाम कितने बढ़ेंगे?
1/7

बजट पेश होते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि इस बार क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा. बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ऐलानों के बाद शराब और सिगरेट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
2/7

इसकी वजह यह है कि टैक्स से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर शराब की कीमतों पर पड़ सकता है. भले ही शराब पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों के पास हो, लेकिन केंद्र सरकार के फैसले इसकी लागत को प्रभावित करते हैं.
3/7

इस बजट में सरकार ने शराब स्क्रैप और खनिजों की बिक्री पर लगने वाले TCS यानी स्रोत पर एकत्र किए जाने वाले कर को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया है. देखने में यह बढ़ोतरी मामूली लगती है, लेकिन जब यह पूरी सप्लाई चेन पर लागू होती है तो इसकी लागत आखिरकार ग्राहक तक पहुंचती है.
4/7

डिस्टिलरी से लेकर थोक व्यापारी और फिर रिटेल दुकान तक, हर स्तर पर बढ़ी हुई लागत कीमत में जुड़ती चली जाती है. भारत में शराब पर एक्साइज ड्यूटी और वैट तय करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है. ऐसे में हर राज्य में शराब के दाम एक जैसे नहीं होते हैं.
5/7

बजट के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि कई राज्य अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बदलाव कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो शराब की कीमतों में और इजाफा तय माना जा रहा है. यही वजह है कि अंतिम कीमत राज्य-दर-राज्य अलग हो सकती है.
6/7

अगर मौजूदा अनुमानों की बात करें तो बजट 2026-27 के असर से शराब की कीमतों में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इसका मतलब यह है कि जो बोतल अभी 500 रुपये में मिल रही है, उसकी कीमत बढ़कर करीब 525 से 550 रुपये तक जा सकती है.
7/7

कुछ राज्यों में टैक्स ज्यादा बढ़ने पर यह कीमत इससे भी ऊपर जा सकती है. हालांकि सटीक दाम राज्य सरकारों के फैसलों के बाद ही साफ होंगे.
