राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर जो कार्यक्रम हो रहे हैं. उनका बीजेपीकरण किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोजनों में केवल बीजेपी और आरएसएस के लोगों को बुलाया जा रहा है, जबकि आम जनता और अन्य वर्गों को शामिल नहीं किया गया है.
अशोक गहलोत ने कहा, “आप सरकार में हो. वंदे मातरम के 150 साल मना रहे हैं. खुशी की बात है. लेकिन ये इन कार्यक्रमों का बीजेपीकरण कर रहे हैं. सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं और RSS के लोगों को बुला रहे हैं. देश की जनता इनमें शामिल ही नहीं हैं. सभी को शामिल करना चाहिए.”
गहलोत ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सभी दलों, समाजसेवियों, पत्रकारों और प्रतिष्ठित लोगों को बुलाना चाहिए. उन्होंने कहा, “देश के अंदर ऐसे इवेंट बहुत महत्व रखते हैं. मैंने हमेशा देखा है कि जब ऐसे आयोजन होते हैं तो सबको बुलाया जाता है. उनसे सुझाव मांगे जाते हैं कि एक साल तक चलने वाले कार्यक्रमों में क्या किया जाए. यह कायदा होता है. लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है.”

‘वंदे मातरम कांग्रेस ने सबसे पहले गाया था’
कांग्रेस नेता ने कहा कि वंदे मातरम का इतिहास कांग्रेस से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, “इनका संबंध क्या है उस वंदे मातरम से? आज तक इनकी शाखा में वंदे मातरम नहीं गाया गया है. इनका अलग गीत है वंदे मातरम. पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर जी ने वंदे मातरम गाया था. तब से कांग्रेस गाती आई है. देश की स्तुति है, कोई दिक्कत नहीं, आप भी गाओ. लेकिन अब आपने 100 साल बाद शुरू किया है तो भी ठीक है, पर इसे राजनीति में मत बदलो.”
सरकार का पैसा, कार्यक्रम बीजेपी का
गहलोत ने आगे कहा, “सरकार का विज्ञापन होता है. अब हम सोच नहीं सकते कि क्या क्या कर रहे हैं. सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन कार्यक्रम बीजेपी का हो रहा है. यह गलत है. अगर सरकार का पैसा खर्च हो रहा है तो सबकी भागीदारी होनी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि ऐसे आयोजनों में सभी समुदायों और राजनीतिक दलों को शामिल करे. गहलोत ने कहा, “लोग बिरसा मुंडा जी के नाम पर कार्यक्रम कर रहे हैं, लेकिन आदिवासी समाज को पूछते तक नहीं. कम से कम दिखावे के लिए ही सबको शामिल कर लो. यह कोई बीजेपी का प्रोग्राम नहीं हो सकता जब पैसा सरकार का लग रहा है.”
गहलोत ने कहा, “मैं कहना चाहूंगा कि हालात बड़े गंभीर हैं. सरकार 5-7 सौ करोड़ रुपये उड़ा देगी और बड़े-बड़े इवेंट करेगी, लेकिन भागीदारी किसी की नहीं होगी. देश में यह परंपरा कभी नहीं रही कि सरकारी कार्यक्रम सिर्फ एक पार्टी के लोग करें. यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है.”
