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बंगाल की खाड़ी में क्यों आते हैं सबसे ज्यादा तूफान, किन-किन देशों का मौसम बदल देता है यह समंदर?

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देशभर में इस कड़ाके की ठंड में भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में बना कम दबाव का क्षेत्र तेजी से मजबूत हो रहा है. ऐसे में दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम बिगड़ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भी बारिश का अनुमान जताते हुए अलर्ट जारी किया है. इसके साथ ही समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की चेतावनी दी गई है, जिसके चलते मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है.

मौसम विभाग की इस चेतावनी के साथ ही बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफान एक बार फिर चर्चा में आ गए है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी में सबसे ज्यादा तूफान क्यों आते हैं और यह समंदर किन- किन देशों को मौसम बदल देता है.

 

 

बंगाल की खाड़ी में क्यों आते हैं सबसे ज्यादा तूफान?

मौसम विभाग और कई रिसर्च के अनुसार पिछले करीब 120 सालों में भारत में आए कुल चक्रवाती तूफानों में से लगभग 86 प्रतिशत बंगाल की खाड़ी में आए हैं. वहीं खतरनाक कैटेगरी के करीब 77 प्रतिशत चक्रवात भी इसी क्षेत्र से निकले. इसके उलट अरब सागर में तूफानों की संख्या बहुत कम रही है. वहीं मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण समुद्र की सतह का तापमान है. बंगाल की खाड़ी का तापमान साल भर 27 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है, जो चक्रवात बनने के लिए सबसे सही माना जाता है. दरअसल गर्म पानी से ज्यादा भाप बनती है, जिससे हवा ऊपर उठती है और कम दबाव का क्षेत्र तैयार होता है. यही प्रक्रिया आगे चलकर तूफान का रूप ले लेती है. वहीं इसके मुकाबले अरब सागर ठंडा रहता है, इसलिए वहां बने सिस्टम ज्यादातर कमजोर पड़ जाते हैं या फिर दिशा बदल लेते हैं.

बंगाल की खाड़ी में तूफान के लिए हवा का बहाव भी जिम्मेदार

बंगाल की खाड़ी में हवा का बहाव ऐसा है कि बने हुए सिस्टम को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है. इसके अलावा भारत का पूर्वी तट पश्चिमी तट की तुलना में ज्यादा समतल है. जिसकी वजह से जब तूफान तट से टकराते हैं तो उनकी दिशा आसानी से नहीं बदलती और वो ज्यादा खतरनाक होते हैं. वहीं अगर आंकड़ों की बात करें तो पूर्वी तट पर आने वाले करीब 48 प्रतिशत तूफान अकेले ओडिशा में टकराते हैं. इसके बाद आंध्र प्रदेश में लगभग 22 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में करीब 18.5 प्रतिशत और तमिलनाडु में लगभग 11.5 प्रतिशत तूफानों का असर देखा गया है. यही वजह है कि पूर्वी तट को हमेशा हाई रिस्क जोन माना जाता है.

किन देशों पर पड़ता है असर?

बंगाल की खाड़ी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. इससे उठने वाले चक्रवात भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड तक के मौसम को प्रभावित करते हैं. चेन्नई, कोलकाता, ढाका, यांगून और बैंकॉक जैसे घनी आबादी वाले तटीय शहर इन तूफानों के प्रति ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं.

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