रायपुर/ 29 अगस्त देश में बाल चिकित्सा हृदय उपचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर ने 14 वर्षीय बालक पर भारत का पहला रिट्रीवेबल लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। यह अभिनव प्रक्रिया 21 अगस्त 2025 को डॉ. सुमंता शेखर पाधी के नेतृत्व में पूरी की गई।
जन्मजात हृदय रोग से जूझता बालक, अब स्वस्थ
इस बालक को 2 वर्ष की आयु में इंट्राकार्डियक रिपेयर और 5 वर्ष की उम्र में कंप्लीट हार्ट ब्लॉक हुआ था। 2024 में ड्यूल-चैंबर पेसमेकर लगाया गया, परंतु निकेल एलर्जी के कारण बार-बार जटिलताएं उत्पन्न होने लगीं। इस स्थिति में रिट्रीवेबल लीडलेस पेसमेकर सबसे सुरक्षित और दीर्घकालिक विकल्प के रूप में सामने आया।
ऑपरेशन में विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
यह प्रक्रिया जनरल एनेस्थीसिया में की गई, और ऑपरेशन के अगले ही दिन बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस उपलब्धि में कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी और एनेस्थीसिया विभागों की टीमों ने सामूहिक भूमिका निभाई। प्रोक्तर डॉ. बलबीर सिंह की तकनीकी विशेषज्ञता ने भी इसमें योगदान दिया।
डॉ. सुमंता शेखर पाधी ने कहा:
“यह तकनीक बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। रिट्रीवेबल डिज़ाइन भविष्य में डिवाइस रिप्लेसमेंट को सरल और सुरक्षित बनाता है।”
फैसिलिटी डायरेक्टर श्री अजित बेल्लमकोंडा ने कहा:
“एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल पिछले 14 वर्षों से उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं दे रहा है। हृदय रोग विभाग 24×7 कैथ लैब और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है।”
राष्ट्रीय स्तर पर एक नई मिसाल
एबॉट लिमिटेड द्वारा विकसित यह लीडलेस पेसमेकर अब जटिल हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों के लिए आशा की नई किरण बन गया है। यह उपलब्धि भविष्य में कम इनवेसिव और दीर्घकालिक हृदय समाधान की दिशा में भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगी।
मुख्य विशेषताएं:
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✅ भारत का पहला रिट्रीवेबल लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांट
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✅ न्यूनतम इनवेसिव तकनीक
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✅ निकेल एलर्जी जैसी जटिलताओं के लिए समाधान
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✅ 14 वर्षीय मरीज को नया जीवन