जमीन के बदले नौकरी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई. यह मामला आरजेडी सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव समेत कई आरोपियों से जुड़ा है. वहीं स्पेशल सीबीआई जज विशाल गोग ने इस मामले में आरोप तय करने पर सुनवाई कर रहे हैं. इस केस में कुल 103 आरोपी हैं, जिनमें से चार की मौत हो चुकी है.
वहीं कोर्ट में राबड़ी देवी की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जमीन और नौकरी के बीच कोई सीधा कनेक्शन नहीं है, जब जमीन खरीदी गई और उसके बदले पैसे दिए गए तो अधिक से अधिक यह कहा जा सकता है कि जमीन सस्ती दर पर खरीदी गई, लेकिन इसे नौकरी के बदले जमीन कहना गलत है.
राबड़ी देवी को कैसे हैं लाभार्थी- वकील
राउज एवेन्यू कोर्ट में राबड़ी देवी के वकील ने कोर्ट में सवाल उठाया कि सीबीआई का आरोप है कि राबड़ी देवी को फायदा मिला, लेकिन जब जमीन के सौदे का सेल डीड के माध्यम से हुए तो उन्हें कैसे लाभार्थी माना जा सकता है. अगर मैं खरीदार हूं और पैसे चुका रहा हूं तो फिर मैं फायदा कैसे ले रहा हूं. लाभ तो तभी होता जब जमीन मुफ्त या एहसान के तौर पर मिलती है.
कोर्ट में उठा गवाह के बयान का जिक्र
कोर्ट में वकील ने दलील देते हुए कहा कि सीबीआई के ही एक प्रमुख गवाह ने बताया कि उसे जमीन बेचने के लिए इसलिए कहा गया, क्योंकि लालू यादव बड़ी जमीन बनाना चाहते थे. जमीन खरीदना अपराध नहीं है. सीबीआई का कहना है कि नौकरी के बदले जमीन ली गई, लेकिन उन्होंने खुद माना है कि जमीन खरीदी गई तो फिर रिश्वत का सवाल कहां है?
सीबीआई का मामले में आरोप
जांच एजेंसी सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव ने साल 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए मध्यप्रदेश में जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे जोन में ग्रुप डी श्रेणी की भर्तियों की और इसके एवज में उम्मीदवारों और उनके परिवारों से जमीन अपने परिवार या सहयोगियों के नाम पर लिखवा लिए. फिलहाल राउज एवेन्यू कोर्ट में राबड़ी देवी की तरफ से बुधवार को भी सुनवाई होगी.