भिलाई/ 18 अगस्त मातृभाषा छत्तीसगढ़ी को सरकारी कामकाज, शिक्षा और रोजगार में स्थान दिलाने के उद्देश्य से रविवार को भिलाई के प्रगति भवन (सिविक सेंटर) में “गुनान गोष्ठी” का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में भाखा के सम्मान की मांग की।
मुख्य बातें और निर्णय:
छत्तीसगढ़ी में डिग्रीधारी युवाओं को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव पारित
राज्य के न्यायालय, बैंक और अन्य विभागों में छत्तीसगढ़ी अनुवादक की नियुक्ति की मांग
शिक्षा संस्थानों में छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम व शिक्षक रखे जाने पर बल
जनगणना, आधार, जन्म प्रमाण पत्र में मातृभाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ दर्ज कराने का आग्रह
सरकारी कार्यों में छत्तीसगढ़ी भाषा में आवेदन व आरटीआई लगाने की अपील
मीडिया व शिक्षा में छत्तीसगढ़ी शब्दों की एकरूपता बनाए रखने की बात
राजभाषा आयोग के लिए ₹5 करोड़ का बजट प्रस्ताव पास
प्रत्येक विभाग में छत्तीसगढ़ी राजभाषा अधिकारी की नियुक्ति की मांग
वक्ताओं ने क्या कहा:
प्रो. सुधीर शर्मा ने कहा –
“जब एमए की पढ़ाई छत्तीसगढ़ी में हो सकती है, तो प्राइमरी शिक्षा छत्तीसगढ़ी में क्यों नहीं?”
सत्यजीत साहू (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ी समाज) ने कहा –
“हमारी लड़ाई किसी भाषा से नहीं, बल्कि अपनी अस्मिता, संस्कृति और अंतिम व्यक्ति तक न्याय की है।”
वरिष्ठ साहित्यकार पीसी लाल यादव ने कहा –
“मातृभाषा से ही मानसिक विकास होता है, हमें आंतरिक रूप से भाषा और संस्कृति से जुड़ना होगा।”
अनिल भतपहरी (पूर्व सचिव, राजभाषा आयोग) ने कहा –
“कामकाज की भाषा बनाकर ही छत्तीसगढ़ी को स्थायी सम्मान दिलाया जा सकता है।”
दुर्गा प्रसाद पारकर ने कहा –
“भाषा को रोजगार से जोड़ना ज़रूरी है, तभी यह जनजीवन से जुड़ेगी।”
पुस्तक विमोचन भी हुआ:
इस अवसर पर ‘गांव के गोठ’ नामक छत्तीसगढ़ी मुहावरा और लोकोक्ति पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसे शानू बंजारे ने लिखा है।
कार्यक्रम की खास बातें:
-
दीप प्रज्वलन से आरंभ हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी और कलाकार उपस्थित रहे।
-
संचालन केशव साहू ने किया और आयोजन में छत्तीसगढ़ी समाज की सक्रिय भूमिका रही।
-
वक्ताओं ने राजनीति से ऊपर उठकर मातृभाषा के लिए सामाजिक आंदोलन खड़ा करने की बात कही।