दिल्ली मेट्रो आज दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन बन चुकी है। रोजाना 60 से 70 लाख से ज्यादा यात्री मेट्रो में सफर करते हैं, वहीं कई बार यह आंकड़ा 80 लाख के पार भी पहुंच जाता है. इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के सफर करने से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी DMRC की कमाई भी हर साल बढ़ती जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली मेट्रो एक घंटे में कितना पैसा कमाती है और यह रकम आखिर जाती कहां है.
सालाना कितनी है DMRC की कमाई?
DMRC की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में दिल्ली मेट्रो ने 7,661 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी. इससे पहले वित्त वर्ष 2022-23 में DMRC को 6,919 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. इस हिसाब से एक साल में ही DMRC की कमाई में करीब 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
एक घंटे में इतना कमाती है मेट्रो
सालाना कमाई के आंकड़ों के आधार पर अगर औसत निकाला जाए, तो दिल्ली मेट्रो रोजाना करीब 21 करोड़ रुपये की कमाई करती है. दिल्ली मेट्रो सुबह करीब 5 बजे से रात करीब साढ़े 11 बजे तक यानी रोजाना करीब 18 से 19 घंटे तक चलती है. इस हिसाब से देखा जाए, तो दिल्ली मेट्रो हर घंटे औसतन एक करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर लेती है. यह आंकड़ा त्योहारों और वीकेंड के दौरान बढ़ती भीड़ के चलते और भी ज्यादा हो सकता है.
विज्ञापन और दुकानों से भी आता है पैसा
टिकट किराए के अलावा DMRC की कमाई का करीब 10 से 20 फीसदी हिस्सा नॉन-फेयर रेवेन्यू से आता है. दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में लगे पोस्टर और विज्ञापनों से भी अच्छी-खासी कमाई होती है. इसके अलावा मेट्रो स्टेशन परिसर में बनी दुकानों और रेस्टोरेंट को किराए पर देकर भी DMRC आमदनी करता है. रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और दूसरे शहरों व देशों को दी जाने वाली तकनीकी सलाह यानी कंसल्टेंसी सेवाओं से भी DMRC की कमाई में इजाफा होता है.

हाल ही में बढ़ा है मेट्रो का किराया
गौरतलब है कि करीब 8 साल बाद दिल्ली मेट्रो के किराए में बदलाव किया गया है. इससे पहले मेट्रो का किराया साल 2017 में बढ़ाया गया था. नई व्यवस्था के तहत 2 किलोमीटर तक की यात्रा पर अब 10 की जगह 11 रुपये किराया लगता है, वहीं 2 से 5 किलोमीटर की दूरी के लिए 21 रुपये चुकाने होते हैं. इसी तरह अलग-अलग दूरी के हिसाब से किराए में 1 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है.
किसके खाते में जाती है यह रकम?
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की साझेदारी में बना एक सार्वजनिक उपक्रम है, यानी इसमें दोनों सरकारों की बराबर हिस्सेदारी होती है. ऐसे में मेट्रो से होने वाली कमाई सबसे पहले DMRC के खाते में जाती है, जिसका इस्तेमाल परिचालन खर्च, रखरखाव, कर्मचारियों की सैलरी और नए प्रोजेक्ट्स के विस्तार में किया जाता है. इसके बाद बचने वाली रकम में से केंद्र और दिल्ली सरकार, दोनों को हिस्सेदारी के अनुसार फायदा मिलता है.
