मानसून ने सरकार के विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है. हालात ये हैं कि आम आदमी के लिए श्मशान घाट जाकर अपने मृत परिजन की अंतिम यात्रा करना भी मुश्किल हो गया है.
ताज़ा मामला राजधानी से सटे दुर्ग जिले का है, जहां लोगों को एक मृत व्यक्ति को शमशान घाट ले जाते समय बड़े-बड़े गड्ढों और पानी भरे रास्तों से गुजरना पड़ा. इसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही है.
अंतिम यात्रा का वीडियो वायरल
राजधानी रायपुर से सटे दुर्ग जिले के सेमरिया गांव के एक व्यक्ति की अंतिम यात्रा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में जिस अंतिम यात्रा की तस्वीर सामने आई, उसमें ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर श्मशान घाट की ओर जाते देखा जा सकता है. ग्रामीणों के मुताबिक, गांव से श्मशान घाट तक करीब डेढ़ किलोमीटर रास्ता कीचड़ से भरा है. आगे नाले को पार करते समय कमर तक पानी पहुंच जाता है. शव को वहां से निकालने के लिए करीब 30 से 40 लोगों को कंधा लगाना पड़ा. कई लोग कीचड़ में फिसलकर गिर भी गए.
गड्ढो और कीचड़ से गुजरने को मजबूर लोग
बता दें कि सेमरिया गांव दुर्ग जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर और भिलाई इस्पात संयंत्र से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है. यह बागडूमर ग्राम पंचायत का आश्रित गांव है. करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में बारिश के दौरान बागडूमर से आने वाला करीब 4 किलोमीटर का रास्ता बेहद खराब, जिसपर वाहनों को लेकर निकलना बड़ी चुनौती सा बन जाता है.
ग्रामीणों का दावा है कि सड़क पर जगह-जगह पानी से भरे सैकड़ों गड्ढे हैं और कीचड़ के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है. वीडियो बनाने वाले रामअवतार यादव ने बताया कि श्मशान घाट में शेड बना हुआ है, लेकिन रास्ता खराब होने के कारण बारिश के दौरान वहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा कि वो बचपन से गांव की यही बदहाल स्थिति देखते आ रहे हैं.

क्या कहना है गांव के लोगों का?
ग्रामीण तन्नू सोरी ने कहा कि बरसात में वो यही सोचते हैं कि गांव में किसी की मौत न हो, क्योंकि अंतिम यात्रा के दौरान होने वाली परेशानी बेहद दर्दनाक है. उन्होंने सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि खराब रास्ते के कारण बच्चे और युवा भी अहिवारा तक पढ़ाई के लिए आसानी से नहीं पहुंच पाते. दूसरी तरफ जिम्मेदार लोग सरकारी योजनाओं का हवाला देते नजर आए.
सरकारी अधिकारियों का क्या कहना है?
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह के मुताबिक, सेमरिया में दो सड़कों की समस्या है. मुख्य सड़क 2013 में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी थी, लेकिन बाद में इस सड़क का मेंटेनेंस नहीं हुआ. इस सड़क के सुधार के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है. वहीं, श्मशान घाट तक जाने वाली सड़क के लिए ग्रामीण सड़क योजना के अभियंता को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं. सर्वे के बाद सड़क को योजना में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा. दूसरी तरफ दुर्ग सांसद विजय बघेल भी सरकारी योजनाओं की दुहाई देते नजर आए.
कुल मिलकर जिम्मेदारों के पास सरकारी योजनाओ के खोखले आंकड़ों और विकास के झूठे दावो के अलावा जनता के लिए ना तो कोई ठोस योजना है और ना ही जनता को राहत देने की नियत ही दिखाई दे रही है. ऐसे में गांव की जनता बस यही दुआ कर रही है कि बरसात के मौसम के किसी अपने की मौत ना हो.
