ब्रह्मांड के रहस्यों में सबसे बड़ा भ्रम हमारे सौर मंडल के केंद्र यानी सूर्य के रंग को लेकर है. बचपन से ही हम अपनी ड्राइंग बुक में सूरज को सुनहरे पीले या चटक नारंगी रंग में रंगते आए हैं, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर यह रंग पूरी तरह से एक नजर का धोखा साबित होता है. हकीकत यह है कि अंतरिक्ष की गहराइयों से देखने पर हमारा सूरज किसी पीले गोले की तरह नहीं, बल्कि दूध की तरह सफेद और चमकता हुआ दिखाई देता है. रंगों का यह सारा खेल हमारी पृथ्वी के वायुमंडल और प्रकाश के बिखरने की प्रक्रिया पर टिका हुआ है.
1/8

खगोलविदों और वैज्ञानिकों के शोध बताते हैं कि सूरज का वास्तविक रंग शुद्ध सफेद है. सूर्य से निकलने वाली रोशनी दरअसल एक जटिल मिश्रण है, जिसमें इंद्रधनुष के सातों रंग समाहित होते हैं. जब ये सभी रंग एक साथ मिलकर बाहर निकलते हैं, तो हमारी आंखों को यह प्रकाश सफेद दिखाई देता है.
2/8

यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन या चंद्रमा से ली गई तस्वीरों में सूरज बिना किसी पीलेपन के बिल्कुल सफेद नजर आता है. वहां पृथ्वी जैसा वायुमंडल न होने के कारण प्रकाश अपने असली स्वरूप में रहता है.
3/8

सूरज के पीले या नारंगी दिखने की मुख्य वजह पृथ्वी के चारों ओर मौजूद गैसों और धूल के कणों का आवरण है. जब सूर्य की किरणें हमारे वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो वे हवा में मौजूद कणों से टकराकर चारों तरफ फैल जाती हैं.
4/8

विज्ञान की भाषा में इस प्रक्रिया को प्रकीर्णन या स्कैटरिंग कहा जाता है. चूंकि नीले और बैंगनी रंग की वेवलेंथ छोटी होती है, इसलिए ये रंग सबसे ज्यादा बिखरते हैं, जिससे आसमान नीला दिखता है और सूरज का बचा हुआ प्रकाश हमें हल्का पीला महसूस होता है.
5/8

सुबह और शाम के वक्त सूरज का रंग बदलकर गहरा नारंगी या लाल हो जाना एक विशेष खगोलीय घटना है. इस समय सूरज क्षितिज के करीब होता है, जिसके कारण उसकी रोशनी को हमारी आंखों तक पहुंचने के लिए वायुमंडल की एक बहुत लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
6/8

इस लंबी यात्रा के दौरान कम वेवलेंथ वाले नीले और हरे रंग पूरी तरह से बिखर कर रास्ते में ही लुप्त हो जाते हैं. केवल लंबी वेवलेंथ वाले लाल और नारंगी रंग ही हम तक पहुंच पाते हैं, जिससे डूबता सूरज लालिमा लिए हुए दिखता है.
7/8

सूरज की इस बेहिसाब चमक और सफेदी के पीछे उसके केंद्र में चलने वाली परमाणु संलयन की प्रक्रिया है. सूरज के भीतर हाइड्रोजन के परमाणु मिलकर हीलियम बनाते हैं, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा और प्रकाश पैदा होता है.
8/8

इसकी सतह का तापमान लगभग 5500 डिग्री सेल्सियस रहता है. इतनी अधिक ऊष्मा और ऊर्जा ही उसे ब्रह्मांड का एक चमकीला तारा बनाती है. अंतरिक्ष में बिना किसी बाधा के यह प्रकाश पूरी तेजी से फैलता है, लेकिन धरती पर आते-आते यह हमारे वायुमंडल के फिल्टर से गुजरकर अपना रूप बदल लेता है.
