रेगिस्तान की तपिश के नीचे बहती तेल की नदियां फारस की खाड़ी को दुनिया का सबसे अमीर हिस्सा बनाती हैं. आखिर क्या वजह है कि दुनिया का सबसे बेहतरीन और प्रचुर कच्चा तेल इसी क्षेत्र में मिलता है? यह केवल इत्तेफाक नहीं, बल्कि कुदरत का वह करिश्मा है जो करोड़ों सालों तक धरती के नीचे चली उथल-पुथल का परिणाम है. यहां के कुओं से निकलने वाला तेल रूस जैसे देशों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है, जिसने इसे वैश्विक ऊर्जा का केंद्र बना दिया है.
करोड़ों साल की प्लेटों वाली टक्कर
फारस की खाड़ी का तेल भंडार दो विशाल टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी संघर्ष का नतीजा है. दक्षिण-पूर्व से अरब प्लेट और उत्तर-पूर्व से यूरेशियन प्लेट के बीच करीब 3 करोड़ सालों से टक्कर चल रही है. इस निरंतर दबाव ने जमीन के नीचे की ठोस चट्टानों को मोड़कर गुंबद जैसी संरचनाएं बना दीं. इन गुंबदों ने एक प्राकृतिक ढक्कन या ‘ट्रैप’ का काम किया, जहां तेल और गैस रिसकर बाहर जाने के बजाय एक ही जगह पर सुरक्षित जमा होते रहे.
जाग्रोस पर्वत और गहरा तेल गड्ढा
जाग्रोस पर्वत श्रृंखला के ऊपर उठने से फारस की खाड़ी के ठीक नीचे एक गहरा और विशाल गड्ढा बन गया. समय के साथ यह गड्ढा मिट्टी और पत्थरों की परतों से भर गया. जैसे-जैसे ये परतें मोटी होती गईं, गहराई में गर्मी और दबाव बढ़ता गया. यही वह उच्च दबाव और तापमान था, जिसने चट्टानों के भीतर छिपे जैविक पदार्थों को कच्चे तेल और गैस में बदलना शुरू कर दिया. इस प्रक्रिया ने खाड़ी के नीचे हाइड्रोकार्बन का एक अथाह भंडार तैयार कर दिया.

समुद्री जीवों का जैविक कमाल
तेल बनने के लिए सबसे जरूरी चीज है जैविक पदार्थ, और फारस की खाड़ी प्राचीन काल से ही समुद्री सूक्ष्मजीवों से समृद्ध रही है. यहां की चूना पत्थर और मिट्टी की चट्टानों में ये जीव दबे हुए हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि किसी चट्टान में 2 प्रतिशत जैविक पदार्थ हो, तो वहां तेल बन सकता है. लेकिन फारस की खाड़ी की चट्टानों में यह मात्रा 1 से 13 प्रतिशत तक है. यही प्रचुरता यहां तेल की ‘नदियों’ के बहने का सबसे बड़ा कारण है.
विशाल भंडार और बेहतरीन कुएं
बीबीसी की रिपोर्ट और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, फारस की खाड़ी में 30 से अधिक ऐसे विशाल तेल भंडार हैं, जिनमें से प्रत्येक में पांच अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है. दिलचस्प बात यह है कि यहां के तेल के कुएं उत्पादन के मामले में रूस जैसे देशों से दो से पांच गुना तक बेहतर हैं. यहां की चट्टानों की सरंध्रता इतनी अच्छी है कि तेल आसानी से बाहर निकलता है, जिससे उत्पादन लागत कम और मुनाफा ज्यादा होता है.
हाइड्रोकार्बन के लिए परफेक्ट ‘ट्रैप’
पेट्रोलियम भूविज्ञानी स्कॉट एल मोंटगोमरी बताते हैं कि यहां की भूगर्भीय चट्टानें हाइड्रोकार्बन पैदा करने के मामले में दुनिया में सबसे सक्षम हैं. यहां की मुड़ी-तुड़ी चट्टानें तेल को बाहर नहीं निकलने देतीं. जब समुद्री सूक्ष्मजीवों से तेल बनता है, तो वह चट्टानों के छिद्रों से ऊपर की ओर बढ़ता है, लेकिन ऊपर मौजूद ‘सीलिंग रॉक’ या अभेद्य चट्टानें उसे वहीं रोक लेती हैं. इसी प्राकृतिक घेराबंदी की वजह से यहां ‘ब्लैक गोल्ड’ का विशाल समंदर इकट्ठा हो गया है.
