Womens Reservation Bill: केंद्र सरकार आज संसद के विशेष सत्र में 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए अहम बिल पेश करेगी. इसमें संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026, परिसीमन बिल और नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े संशोधन शामिल है. क्योंकि इस कदम का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लाना है, इस वजह से यह समझना काफी जरूरी है कि महिला सांसदों का मौजूदा प्रतिनिधित्व कैसा है और आजादी के बाद से इसमें किस तरह के बदलाव देखने को मिले हैं.
18वीं लोकसभा में मौजूद प्रतिनिधित्व
फिलहाल 18वीं लोकसभा बिल्कुल 543 सदस्यों में से 74 महिला सांसद हैं. यह लगभग 13.6% प्रतिनिधित्व बनता है. यह इस बात को दिखाता है कि प्रस्तावित 33% कोटे के मुकाबले महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम है.
1952 की लोकसभा
भारत की पहली लोकसभा 1952 में सिर्फ 22 महिला सांसद चुनी गई थीं. यह कुल सदस्यों का महज 4.4% थीं. यह आजादी के शुरुआती सालों में राजनीति में महिलाओं की सीमित भागीदारी को दिखाता है.
दशकों में लगातार बढ़ोतरी
समय के साथ महिला सांसदों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी हैं. 1950 के दशक से लेकर हाल के समय तक हर चुनावी चक्र में संसदीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में धीमी लेकिन लगातार बढ़ोतरी में योगदान दिया है.

2019 में सबसे ज्यादा रिप्रेजेंटेशन
महिला सांसदों की सबसे ज्यादा संख्या 17वीं लोकसभा में दर्ज की गई. उस वक्त 78 महिलाएं चुनी गई थीं. यह लगभग 14.4% का शिखर था. यह भारत के संसदीय इतिहास में सबसे ज्यादा था.
2024 में थोड़ी गिरावट
2024 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या थोड़ी घटकर 74 हो गई थी. छोटी मोटी गिरावटों के बावजूद लंबे समय का रुझान काफी सकारात्मक ही बना हुआ है. महिलाओं का प्रतिनिधित्व 3 गुना से भी ज्यादा बढ़ा है. 1952 में 22 सांसदों से बढ़कर यह आज 74 हो गया है. इसी बीच आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल ने सबसे ज्यादा महिला सांसद भेजी हैं. पश्चिम बंगाल से यह संख्या 11 की रही है. अगर पार्टियों की बात करें तो प्रमुख पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस का महिला सांसदों में सबसे ज्यादा हिस्सा है. यह हिस्सा 38% का है.
अब भारत सरकार महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसी के साथ देश राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव को देख सकता है. अगर प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो 33% का यह कोटा शासन प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी के भविष्य को काफी हद तक एक नया रूप देगा.
