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ग्रीनलैंड तो खरीदना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप, लेकिन वहां जमीन की कीमत कितनी?

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दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप, बर्फ से ढकी जमीन और राजनीति से कहीं ज्यादा अलग सोच. जब डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई, तो पूरी दुनिया चौंकी थी. सवाल सिर्फ इतना नहीं था कि अमेरिका ऐसा क्यों चाहता है, बल्कि हैरानी यह भी थी कि क्या ग्रीनलैंड खरीदा भी जा सकता है? यहां जमीन को लेकर ऐसे नियम हैं, जो किसी भी रियल एस्टेट कारोबारी की सोच उलट कर रख दें. आइए जान लेते हैं.

ट्रंप की दिलचस्पी और ग्रीनलैंड की सच्चाई

अब तो आलम यह हो चुका है कि डोनाल्ड ट्रंप का नाम आते ही किसी देश के राष्ट्रपति तो बाद में पहले तो बिजनेसमैन की याद आती हैं. न्यूयॉर्क से लेकर दुनिया के कई हिस्सों में उनकी पहचान एक रियल एस्टेट टायकून की भी रही है. ऐसे में ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की उनकी इच्छा भी कई लोगों को एक बड़ी ‘प्रॉपर्टी डील’ जैसी लगी, लेकिन ग्रीनलैंड का सिस्टम बाकी दुनिया से बिल्कुल अलग है. यहां जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा धरोहर मानी जाती है.

ग्रीनलैंड में जमीन क्यों नहीं खरीदी जा सकती?

ग्रीनलैंड में जमीन पर किसी एक व्यक्ति या कंपनी का मालिकाना हक नहीं होता है. यहां की कानूनी व्यवस्था के मुताबिक पूरी जमीन सरकार के अधीन रहती है. लोग घर, अपार्टमेंट या इमारत खरीद सकते हैं, लेकिन जिस जमीन पर वह खड़ी है, वह हमेशा सरकारी रहती है. सरकार केवल जमीन के इस्तेमाल की अनुमति देती है, मालिकाना हक की नहीं. यही वजह है कि यहां जमीन की कीमत तय करने जैसा सवाल ही पैदा नहीं होता है.

 

 

घर मिल सकता है, जमीन नहीं

अगर कोई व्यक्ति ग्रीनलैंड में रहना चाहता है, तो वह वहां की हाउसिंग कंपनियों के जरिए घर के लिए आवेदन कर सकता है. ये कंपनियां सरकार के नियमों के तहत काम करती हैं. मकान का आकार परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से तय होता है. उदाहरण के तौर पर चार लोगों के परिवार को चार कमरों का घर दिया जाता है, हालांकि राजधानी नूक जैसे शहरों में आबादी ज्यादा होने के कारण घर पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.

कौन बन सकता है प्रॉपर्टी का मालिक?

ग्रीनलैंड, डेनमार्क या फरो आइलैंड्स के नागरिक ही सामान्य रूप से यहां प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं. बाहर के लोगों के लिए नियम सख्त हैं. अगर कोई विदेशी व्यक्ति लगातार दो साल तक ग्रीनलैंड में रह चुका हो और नियमित टैक्स देता हो, तभी वह प्रॉपर्टी के लिए आवेदन कर सकता है. इसके बाद भी सरकार हर केस की गहराई से जांच करती है.

जमीन के इस्तेमाल का अधिकार कैसे मिलता है?

ग्रीनलैंड में घर बनाने के लिए जमीन खरीदने की बजाय सरकार से जमीन के इस्तेमाल की अनुमति लेनी होती है. इसके लिए नगर पालिका, सरकारी फॉर्म या NunaGIS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन किया जाता है. सरकार यह देखती है कि प्रस्तावित निर्माण इलाके के विकास के लिहाज से सही है या नहीं. अगर उस इलाके के लिए कोई तय टाउन प्लान नहीं है, तो स्थानीय लोगों की राय भी ली जाती है.

घर और जमीन का रिश्ता

यहां एक अहम नियम यह भी है कि घर और जमीन के इस्तेमाल का अधिकार अलग-अलग नहीं बेचा जा सकता है. यानी कोई भी व्यक्ति सिर्फ इमारत बेचकर जमीन के अधिकार को अलग नहीं कर सकता है. जमीन और घर का अधिकार हमेशा साथ चलता है और किसी भी तरह के ट्रांसफर के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होती है.

ट्रंप की सोच बनाम ग्रीनलैंड की व्यवस्था

डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह निजी संपत्ति और रियल एस्टेट डील्स को देखते हैं, वह ग्रीनलैंड की सामूहिक सोच से बिल्कुल उलट है. यहां लोग मानते हैं कि जमीन ऐसी चीज नहीं है, जिसे कोई अकेला व्यक्ति खरीद सके. यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जाने वाली साझा विरासत है. इसी वजह से ग्रीनलैंड को खरीदने का विचार हकीकत में बदलना लगभग नामुमकिन नजर आता है.

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