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‘ये है रोड ऑफ बोन’ इंसानी हड्डियों से बनी है ये सड़क, जानिए इसका खौफनाक इतिहास…

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दुनिया में आपने तरह–तरह की सड़कों के बारे में सुना होगा. कहीं सबसे लंबी सड़क है, कहीं सबसे ऊंचे पहाड़ों को जोड़ने वाला रास्ता है. कुछ सड़कें अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर हैं, तो कुछ अपने खतरनाक मोड़ों और कठिन मौसम के लिए. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी सड़क के बारे में सुना है, जिसके नीचे हजारों–लाखों इंसानों की हड्डियां दबी हों. दुनिया में एक सड़क ऐसी भी है जो सिर्फ पत्थर, मिट्टी और डामर से नहीं बनी, बल्कि उसमें इंसानों की हड्डियां भी मिली हुई हैं. इसीलिए इस सड़क को रोड ऑफ बोन्स , यानी  हड्डियों की सड़क कहा जाता है. यह नाम सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी इससे भी ज्यादा डरावनी है. तो आइए जानते हैं कि रोड ऑफ बोन इंसानी हड्डियों से बनी सड़क कहां है और इसका खौफनाक इतिहास क्या है.

कहां है यह सड़क?

यह सड़क रूस के बेहद दूर और ठंडे इलाके में स्थित है. असल में यह एक लंबा हाईवे है जिसका नामकोलयमा हाईवे Kolyma Highway है. यह लगभग 2,025 किलोमीटर लंबा है. रूस का यह हिस्सा इतना ठंडा है कि साल के कई महीनों तक यहां बर्फ जमी रहती है. रास्ते अक्सर सफेद बर्फ की मोटी परत में गायब हो जाते हैं.

सड़क में क्यों मिलती हैं इंसानी हड्डियां?

इस हाईवे पर आज भी कई जगहों पर इंसानों की हड्डियां और कंकाल मिल जाते हैं. यह सुनकर लगता है जैसे कोई डरावनी फिल्म हो, लेकिन यह पूरी तरह सच है. कहा जाता है कि सड़क पर बर्फ जमने के कारण गाड़ियां फिसलती थीं. उस समय तकनीक कम थी, इसलिए सड़क को मजबूत बनाने के लिए पत्थर और रेत के साथ इंसानी हड्डियां भी मिलाई गई. ये हड्डियां उन हजारों मजदूरों और कैदियों की थी जो इस हाईवे के निर्माण में ही मर गए थे. माना जाता है कि ढाई लाख से लेकर 10 लाख तक लोग इस सड़क के निर्माण के दौरान मारे गए. उनका खून, उनका पसीना और उनकी हड्डियां सब इस सड़क में दफन हैं. यही कारण है कि दुनिया आज भी इस हाईवे को सम्मान और डर, दोनों नजरों से देखती है.

 

 

क्यों कहा जाता है इसे रोड ऑफ बोन्स?

इस सड़क का निर्माण सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन के समय में हुआ था. 1930 के दशक में जब इसकी शुरुआत हुई, तब लाखों कैदियों को बंधुआ मजदूरी के लिए इस इलाके में भेजा गया. काम की परिस्थितियां इतनी भयानक थी कि कहा जाता है  यहां जो कैदी आया, वह वापस कभी नहीं लौटा. सर्दी इतनी कठोर थी कि तापमान अक्सर -50 डिग्री से भी नीचे चला जाता था. न खाना ठीक, न रहने की जगह, न कपड़े. जो लोग काम करते–करते मर जाते थे, उनके शरीर को दफनाने का समय भी नहीं मिलता था. उन्हें सीधे सड़क के नीचे ही दबा दिया जाता था. इसी वजह से यह हाईवे लाखों मृतकों की हड्डियों पर बना हुआ माना जाता है. आज कोलयमा हाईवे पर वाहन चलते हैं. लोग इसे Adventure Road के रूप में भी देखते हैं.

दुनिया में आपने तरह–तरह की सड़कों के बारे में सुना होगा. कहीं सबसे लंबी सड़क है, कहीं सबसे ऊंचे पहाड़ों को जोड़ने वाला रास्ता है. कुछ सड़कें अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर हैं, तो कुछ अपने खतरनाक मोड़ों और कठिन मौसम के लिए. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी सड़क के बारे में सुना है, जिसके नीचे हजारों–लाखों इंसानों की हड्डियां दबी हों. दुनिया में एक सड़क ऐसी भी है जो सिर्फ पत्थर, मिट्टी और डामर से नहीं बनी, बल्कि उसमें इंसानों की हड्डियां भी मिली हुई हैं. इसीलिए इस सड़क को रोड ऑफ बोन्स , यानी  हड्डियों की सड़क कहा जाता है. यह नाम सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी इससे भी ज्यादा डरावनी है. तो आइए जानते हैं कि रोड ऑफ बोन इंसानी हड्डियों से बनी सड़क कहां है और इसका खौफनाक इतिहास क्या है.

कहां है यह सड़क?

यह सड़क रूस के बेहद दूर और ठंडे इलाके में स्थित है. असल में यह एक लंबा हाईवे है जिसका नामकोलयमा हाईवे Kolyma Highway है. यह लगभग 2,025 किलोमीटर लंबा है. रूस का यह हिस्सा इतना ठंडा है कि साल के कई महीनों तक यहां बर्फ जमी रहती है. रास्ते अक्सर सफेद बर्फ की मोटी परत में गायब हो जाते हैं.

सड़क में क्यों मिलती हैं इंसानी हड्डियां?

इस हाईवे पर आज भी कई जगहों पर इंसानों की हड्डियां और कंकाल मिल जाते हैं. यह सुनकर लगता है जैसे कोई डरावनी फिल्म हो, लेकिन यह पूरी तरह सच है. कहा जाता है कि सड़क पर बर्फ जमने के कारण गाड़ियां फिसलती थीं. उस समय तकनीक कम थी, इसलिए सड़क को मजबूत बनाने के लिए पत्थर और रेत के साथ इंसानी हड्डियां भी मिलाई गई. ये हड्डियां उन हजारों मजदूरों और कैदियों की थी जो इस हाईवे के निर्माण में ही मर गए थे. माना जाता है कि ढाई लाख से लेकर 10 लाख तक लोग इस सड़क के निर्माण के दौरान मारे गए. उनका खून, उनका पसीना और उनकी हड्डियां सब इस सड़क में दफन हैं. यही कारण है कि दुनिया आज भी इस हाईवे को सम्मान और डर, दोनों नजरों से देखती है.

क्यों कहा जाता है इसे रोड ऑफ बोन्स?

इस सड़क का निर्माण सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन के समय में हुआ था. 1930 के दशक में जब इसकी शुरुआत हुई, तब लाखों कैदियों को बंधुआ मजदूरी के लिए इस इलाके में भेजा गया. काम की परिस्थितियां इतनी भयानक थी कि कहा जाता है  यहां जो कैदी आया, वह वापस कभी नहीं लौटा. सर्दी इतनी कठोर थी कि तापमान अक्सर -50 डिग्री से भी नीचे चला जाता था. न खाना ठीक, न रहने की जगह, न कपड़े. जो लोग काम करते–करते मर जाते थे, उनके शरीर को दफनाने का समय भी नहीं मिलता था. उन्हें सीधे सड़क के नीचे ही दबा दिया जाता था. इसी वजह से यह हाईवे लाखों मृतकों की हड्डियों पर बना हुआ माना जाता है. आज कोलयमा हाईवे पर वाहन चलते हैं. लोग इसे Adventure Road के रूप में भी देखते हैं.

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