धमतरी/ धमतरी शहर और जिले की सड़कों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। जिम्मेदार विभागों की अनदेखी के कारण रोजाना सड़कों पर हादसे हो रहे हैं, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ गिट्टी डालकर खानापूर्ति की जा रही है। इससे जहां एक ओर धूल का गुबार उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
“सड़कें लंबी, पर खराबी छोटी”—फिर भी मरम्मत नहीं!
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में सड़कों का नेटवर्क बहुत बड़ा है, लेकिन खराब सड़कों की लंबाई बेहद कम है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही किलोमीटर की सड़कें खराब हैं, जिन्हें समय रहते दुरुस्त किया जा सकता था।
अगर समय पर मरम्मत की जाती, तो आज यह हालात नहीं बनते। लेकिन विभागीय लापरवाही और ‘कामचलाऊ’ रवैये के चलते हालात बद से बदतर हो चुके हैं।
गिट्टी से उड़ती धूल, दुकानदार और राहगीर परेशान
मरम्मत के नाम पर सिर्फ गिट्टी डाल दी जाती है। जब गाड़ियाँ उन पर चलती हैं, तो धूल का गुबार उठता है, जिससे आसपास के दुकानदार और राहगीर खासे परेशान हैं। खासकर व्यापारिक मार्गों पर दुकानदारों की हालत बेहद खराब हो गई है।
“डामर से होती मरम्मत, तो कई साल टिकती सड़क”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जितना पैसा गिट्टी डालने में खर्च होता है, उतने में यदि डामर या पक्का मसाला इस्तेमाल किया जाता, तो सड़क वर्षों तक सही रहती।
लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य में जानबूझकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि बार-बार मरम्मत हो और ठेकेदारों को मुनाफा मिलता रहे।
जनता में आक्रोश, पारदर्शी जांच की मांग
शहरवासियों ने निर्माण विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों की मांग है कि खराब सड़कों की मरम्मत में पारदर्शिता लाई जाए और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।