ग्रेटर नोएडा पुलिस की ईकोटेक-3 थाना पुलिस और सीआरटी टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह बेहद चालाकी से गांजा की खेप को ग्रेनाइट और मार्बल पत्थरों के बीच छिपाकर लाया करता था, ताकि चेकिंग और टोल पर बिना शक के आसानी से निकल सके. पुलिस ने कार्रवाई के दौरान गिरोह के दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से एक कुंतल 64 किलो 700 ग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी बाजार कीमत करीब 40 लाख रुपये आंकी गई है.
ट्रक में मिला गांजा, दो गिरफ्तार, एक फरार
नोएडा सेंट्रल डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने जानकारी दी कि खेड़ा चौगानपुर गोल चक्कर पर वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्रेनाइट पत्थरों के बीच गांजा छिपाकर ले जाया जा रहा है. सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ट्रक को रोका और तलाशी लेने पर गांजा के 31 बंडल बरामद किए. इस दौरान पुलिस ने एटा के भदवास गांव निवासी अलीहसन पुत्र अलीशेर और हाथरस के पचपेरा गांव निवासी योगेंद्र पुत्र मोहर सिंह को गिरफ्तार कर लिया. जबकि उनका तीसरा साथी अरविंद किशोर उर्फ टोनी (निवासी हाथरस) फरार हो गया.
उड़ीसा से आता था गांजा, आंध्र प्रदेश से लाए जाते थे ग्रेनाइट पत्थर
डीसीपी ने बताया कि इस गिरोह की सप्लाई चेन काफी व्यवस्थित थी. आंध्र प्रदेश से ट्रक में ग्रेनाइट पत्थर लोड किए जाते थे और उड़ीसा से गांजा खरीदा जाता था. उसके बाद पत्थरों के बीच गांजा छिपाकर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में सप्लाई की जाती थी. फरार आरोपी अरविंद किशोर ही उड़ीसा से गांजा खरीदकर तस्करों तक पहुंचाता था.
गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है. पुलिस जांच में पाया गया कि अलीहसन और योगेंद्र वर्ष 2019 में भी उड़ीसा में गांजा तस्करी के आरोप में जेल जा चुके हैं. इस बार यह लोग अधिक मुनाफा कमाने के लिए बड़े पैमाने पर खेप ला रहे थे.
पुलिस टीम को सम्मानित किया गया
इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस टीम का हौसला बढ़ाने के लिए उन्हें 25 हजार रुपये का इनाम दिया गया है. पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है और सप्लाई नेटवर्क को तोड़ने के लिए आगे की जांच कर रही है. यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि संगठित अपराध और नशे के खिलाफ पुलिस लगातार सक्रिय है और ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठा रही है.