तुर्की का Bayraktar TB2 आधुनिक युद्ध का गेमचेंजर साबित हुआ है. कम कीमत और आसान ऑपरेशन की वजह से यह उन देशों के लिए वरदान है जो महंगे अमेरिकी ड्रोन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं. यह 2014 से सेवा में है और सीरिया, लीबिया, नागोर्नो-काराबाख और यूक्रेन जैसे युद्धों में इसने दुश्मन के टैंकों और एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर अपनी मारक क्षमता साबित की है.Bayraktar की तुलना में TAI Anka और ज्यादा सक्षम ड्रोन है.
यह 30 घंटे से भी अधिक समय तक उड़ान भर सकता है और भारी हथियार ले जाने की क्षमता रखता है. इसके Anka-S वेरिएंट में सैटेलाइट कंट्रोल और आधुनिक हथियार सिस्टम जुड़ा है. यह निगरानी, स्ट्राइक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सभी भूमिकाओं में कारगर है.चीन का Wing Loong II ड्रोन अमेरिका के MQ-9 Reaper जैसा दिखता है लेकिन कीमत में काफी सस्ता है. यह 32 घंटे तक उड़ सकता है और एक बार में 12 तक मिसाइलें ले जा सकता है.
यही वजह है कि यह मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया के कई देशों में एक्सपोर्ट किया गया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है कम लागत और चीनी हथियारों के साथ आसान एकीकरण.रूस ने 2020 में Orion को अपनी वायुसेना में शामिल किया. यह 24 घंटे तक उड़ सकता है और लगभग 250 किलो तक हथियार ले जा सकता है. भले ही इसकी मारक क्षमता अमेरिकी या चीनी ड्रोन जितनी न हो, लेकिन यह रूस का पहला मध्यम-ऊँचाई वाला कॉम्बैट ड्रोन है जो पूरी तरह घरेलू तकनीक से बना है. Orion अब निर्यात के लिए भी तैयार किया जा रहा है.