अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान के लापता चालक दल के सदस्य को ईरान में भीषण गोलीबारी के बीच अमेरिकी सेना ने बचा लिया है. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी सेना ने दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस दर्जनों विमान उन्हें वापस लाने के लिए भेजे थे.”
उन्होंने आगे कहा, “अमेरिकी सेना ने अपने एक असाधारण क्रू सदस्य के लिए अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक को अंजाम दिया.” बचाव अभियान को लेकर जानकारी देते हुए ट्रंप ने कहा, “मेरे प्यारे अमेरिकी नागरिकों, पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ने अपने एक असाधारण क्रू सदस्य अधिकारी, जो एक सम्मानित कर्नल भी हैं, उनके लिए अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक को अंजाम दिया है.
रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर क्या बोले ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि अब वह सुरक्षित हैं. यह बहादुर योद्धा ईरान के दुर्गम पहाड़ों में था, जिसका हमारे दुश्मन पीछा कर रहे थे और हर घंटे करीब आते जा रहे थे, लेकिन वह कभी भी पूरी तरह से अकेला नहीं था क्योंकि उसके कमांडर इन चीफ, युद्ध सचिव, संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष और साथी सैनिक चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रख रहे थे और बचाव के लिए जी जान से जुटे थे.
दरअसल शुक्रवार (3 अप्रैल) को कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट को ईरान ने निशाना बनाया था, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा, जबकि दूसरा पायलट लापता हो गया था और इसके ईरान में गिरे होने की सूचना थी.

IRGC ने रखा था 60,000 डॉलर से अधिक का इनाम
ईरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में लापता अमेरिकी पायलट को ना सिर्फ अमेरिकी सेना खोज रही था बल्कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी पूरे इलाके की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था. IRGC ने पायलट को खोजने के लिए सैनिकों के अलावा स्थानीय लोगों से भी अपील की थी और पायलट को जिंदा पकड़ने पर लगभग 60,000 डॉलर से अधिक का इनाम रखा था.
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना रुख और कड़ा करते हुए उसे 48 घंटे का अंतिम समय दिया है. ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ईरान के पास समझौता करने या होर्मुज को खोलने के लिए अब केवल 2 दिन का समय बचा है, उसके बाद ईरान पर कहर बरपेगा.
