भारत की तरह पाकिस्तान में भी मेट्रो रेल सिस्टम है. पाकिस्तान में पहली मेट्रो सेवा ऑरेंज लाइन मेट्रो 25 अक्टूबर 2020 को लाहौर में शुरू की गई थी. हालांकि यह अभी भारत के मेट्रो नेटवर्क के पैमाने से मेल नहीं खाती, इसके बावजूद भी यह पाकिस्तान के शहरी परिवहन विकास में एक बड़ा कदम है. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में मेट्रो का किराया कितना होता है.
लाहौर मेट्रो का किराया
लाहौर ऑरेंज लाइन मेट्रो का किराया सिस्टम दूरी पर आधारित है और यह काफी किफायती भी है. यात्री 4 किलोमीटर तक की छोटी दूरी के लिए लगभग 25 पाकिस्तानी रुपये देते हैं. इसी के साथ पूरे रूट का किराया धीरे-धीरे बढ़कर 45 रुपये तक पहुंच जाता है. यह कीमत किफायती मानी जाती है. इससे यह अलग-अलग आय वर्ग के रोजाना यात्रा करने वालों के लिए सुलभ हो जाती है.
रूट नेटवर्क और कवरेज
ऑरेंज लाइन मेट्रो लगभग 27.1 किलोमीटर तक फैली हुई है और 26 स्टेशनों के जरिए अली टाउन को डेरा गुजरां से जोड़ती है. हालांकि यह नेटवर्क अभी लाहौर में सिर्फ एक लाइन तक ही सीमित है. इसके बावजूद भी यह शहर के अंदर ट्रैफिक की भीड़ कम करने और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है.

क्या-क्या होती है सुविधाएं?
सुविधाओं के मामले में लाहौर मेट्रो दिल्ली मेट्रो जैसे ही आधुनिक सुविधा देती है. ट्रेन वातानुकूलित है, स्टेशनों पर ऑटोमेटिक टिकटिंग सिस्टम लगे हैं और महिला यात्रियों के लिए आरक्षित जगह है. खास बात यह है कि यह सिस्टम बिना ड्राइवर वाली ट्रेनों के संचालन को भी सपोर्ट करता है.
रेल के अलावा पाकिस्तान ने इस्लामाबाद, रावलपिंडी, मुल्तान और लाहौर जैसे शहरों में मेट्रो बस सेवा भी विकसित की है. ये बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम एक किफायती विकल्प देते हैं. इनमें किराया आमतौर पर प्रति यात्री ₹25 से ₹30 के बीच होता है.
भारत और पाकिस्तान की मेट्रो में अंतर
दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके मेट्रो सिस्टम के पैमाने में है. भारत के मेट्रो नेटवर्क खासकर दिल्ली में, कहीं ज्यादा बड़े हैं. दिल्ली मेट्रो 390 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करती है. इसमें 258 से ज्यादा स्टेशन हैं और यह रोजाना लाखों यात्रियों को सेवा देती है. इसके उलट लाहौर की मेट्रो अभी सिर्फ एक कॉरिडोर पर चलती है.
लाहौर मेट्रो का निर्माण चीन के सहयोग से किया गया था और इसमें आधुनिक ऑटोमेटिक सिस्टम शामिल हैं. भारत के मेट्रो नेटवर्क ने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ साझेदारी के जरिए एडवांस तकनीक को अपनाया है. यह दोनों ही सिस्टम स्मार्ट कार्ड और डिजिटल टिकटिंग की सुविधा देते हैं. हालांकि भारत में क्यूआर आधारित यात्रा का चलन काफी ज्यादा है.
