धमतरी/ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव शिकार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी पोचिंग यूनिट, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड और दंतेवाड़ा वन मंडल की संयुक्त टीम ने 9 भारतीय विशाल गिलहरियों के शिकार के आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर की गई।
जानकारी के अनुसार, ओडिशा वन विभाग के कर्मचारियों ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो रील देखी, जिसमें दो व्यक्ति 9 भारतीय विशाल गिलहरियों (Ratufa indica) के साथ नजर आ रहे थे। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-1 में शामिल है, जिसे अत्यधिक संरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
वीडियो सामने आने के बाद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड और दंतेवाड़ा वन मंडल के साथ समन्वय स्थापित किया। जांच के दौरान इंस्टाग्राम रील से आरोपियों की पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया। इसके आधार पर 8 अप्रैल 2026 को दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र से आरोपी बंशीराम कोवासी को गिरफ्तार किया गया।

तलाशी में चौंकाने वाले खुलासे
आरोपी के घर की तलाशी लेने पर एक स्लॉथ बियर (भालू) की खाल और जानवरों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फंदे (स्नेर) बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी आसपास के जंगलों से गिलहरियों का शिकार कर उन्हें बुश मीट (मांस) के रूप में इस्तेमाल करता था। मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है यह प्रजाति
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक एवं डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि भारतीय विशाल गिलहरी वन पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह बीजों के प्रसार में अहम भूमिका निभाती है, जिससे जंगलों का प्राकृतिक पुनर्जनन होता है और वन संरचना स्वस्थ बनी रहती है। यह एक संकेतक प्रजाति भी है, जिसकी मौजूदगी घने जंगल और कम मानव हस्तक्षेप को दर्शाती है।
वन विभाग की सख्त चेतावनी
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के अवैध शिकार और व्यापार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस तरह की किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
